भोपाल। मप्र राज्य महिला आयोग में करीब छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद फिर से जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सोमवार को आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक की संयुक्त बेंच ने घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की।
भोपाल स्थित आयोग कार्यालय में आयोजित पहले जनसुनवाई सत्र में करीब 40 मामलों को प्रस्तुत किया गया। संयुक्त बेंच ने एक-एक आवेदिका की शिकायत सुनी और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अधिकारों के हनन को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना प्राथमिकता रहेगी।
सुनवाई के दौरान कई जटिल पारिवारिक विवाद सामने आए। एक मामले में महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से उसे अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा। ससुराल पक्ष पर बेटी पर दबाव बनाने और दामाद द्वारा झूठी शिकायतें दर्ज कराने के प्रयास के आरोप भी लगाए गए। मामले में बहू पर घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराने के लिए दबाव और एक करोड़ रुपए के कथित लेन-देन की बात भी सामने आई। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्थानीय प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए। एक अन्य घरेलू हिंसा प्रकरण में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आवेदिका को पहले ही समझौता राशि दी जा चुकी है और बच्ची के भविष्य के लिए उसके नाम प्लॉट की रजिस्ट्री भी कराई गई है। इसके बावजूद अतिरिक्त भरण-पोषण सहायता की मांग को लेकर विवाद जारी था। संयुक्त बेंच ने मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। महिला आयोग के पुनर्गठन के बाद शुरू हुई इस जनसुनवाई से पीड़ित महिलाओं में न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

