नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार शाम हुआ बिल्डिंग हादसा पूरे देश को झकझोर गया। महरौली के सैदुलजाब इलाके में स्थित तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मृतकों में दो मेडिकल छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं।
घटना के बाद एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रहीं। मलबे के नीचे कई लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है।
बिल्डिंग मालिक पर गैर-इरादतन हत्या का केस
जानाकारी अनुसार, हादसे के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिक कर्मवीर जेलदार के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत में कई तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं और ऊपरी मंजिल पर निर्माण कार्य भी चल रहा था। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कोचिंग, कैफे और ऑफिस से भरी थी बिल्डिंग
मामले पर स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में एक कोचिंग संस्थान, कैफे और कई निजी कार्यालय संचालित हो रहे थे। तीसरी मंजिल पर निर्माण कार्य जारी था। हादसे के वक्त नीचे मौजूद कैंटीन और मेस में बड़ी संख्या में छात्र खाना खा रहे थे।
बिल्डिंग गिरते ही पूरा ढांचा बगल की टिनशेड कैंटीन पर आ गिरा, जिससे वहां मौजूद छात्र मलबे में दब गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ सेकंड के भीतर पूरी इमारत धूल के गुबार में बदल गई।
मेडिकल छात्रों पर टूटा कहर
सूत्रों के मुताबिक, हादसे के समय कई मेडिकल छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। साथ ही कुछ छात्र विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लौटे थे और यहां पोस्ट ग्रेजुएशन प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे।
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि कई छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन दो युवा डॉक्टरों की जान नहीं बच सकी। घटना के बाद छात्रों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
वहीं घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे को गंभीर लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा कि राजधानी में मौजूद सभी अवैध और असुरक्षित इमारतों की जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
क्या अवैध निर्माण बना हादसे की वजह?
मामले पर स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह इमारत करीब चार से पांच वर्ष पहले बनाई गई थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? क्या अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण बिना स्वीकृति के किया गया था? और क्या संबंधित विभागों ने समय रहते निरीक्षण नहीं किया?
इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन हादसे ने दिल्ली में तेजी से बढ़ते अवैध निर्माण और कमजोर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
कई परिवारों की नजरें मलबे पर टिकीं
एनडीआरएफ और राहत दलों ने देर रात तक अभियान जारी रखा। भारी मशीनों और क्रेनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जब तक अंतिम व्यक्ति की तलाश पूरी नहीं हो जाती, ऑपरेशन जारी रहेगा।
हादसे के बाद कई परिवार अस्पतालों और घटनास्थल के बीच भटकते नजर आए। हर किसी को अपने प्रियजनों की सलामती की चिंता सताती रही।
साकेत बिल्डिंग हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। तेजी से बढ़ते निर्माण, नियमों की अनदेखी और निगरानी में लापरवाही का परिणाम कितना भयावह हो सकता है, इसकी दर्दनाक तस्वीर इस हादसे ने सामने रख दी है।

