वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका की सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव बेहद करीबी मुकाबले में एक वोट से खारिज हो गया। मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 49 और विरोध में 50 वोट पड़े, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के एक सीनेटर डेव मैककॉर्मिक मतदान में शामिल नहीं हुए।
यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता, तो भविष्य में ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेना अनिवार्य हो जाता। प्रस्ताव खारिज होने के बाद फिलहाल राष्ट्रपति के सैन्य कार्रवाई संबंधी अधिकार यथावत बने हुए हैं।
ईरान नीति पर अमेरिकी राजनीति में मतभेद
साथ ही विपक्षी सांसदों का तर्क है कि किसी भी बड़े सैन्य अभियान का अंतिम निर्णय कांग्रेस की मंजूरी के बाद ही होना चाहिए। वहीं, प्रस्ताव के असफल होने के बाद अब इसे दोबारा आगे बढ़ाने के लिए नई संसदीय प्रक्रिया अपनानी होगी।
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पश्चिम एशिया संघर्ष में भारतीय नागरिक भी प्रभावित
वहीं केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान अब तक 16 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 75 भारतीय घायल हुए हैं। सरकार के मुताबिक, ईरान में फंसे 2,557 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर स्वदेश लाया गया। साथ ही, युद्ध क्षेत्र में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के परिजनों को डीजीएमए वेलफेयर स्कीम के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालात के बीच अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय देशों से जुड़े घटनाक्रम वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब आने वाले कूटनीतिक और सैन्य फैसलों पर टिकी हुई है।

