नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े मामले में दिल्ली की अदालत ने फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया है। करीब तीन साल तक चली इस कानूनी लड़ाई में अदालत में 127 बार सुनवाई हुई। जनवरी 2023 में शुरू हुआ यह मामला 1133 दिनों की प्रक्रिया के बाद फैसले तक पहुंचा।
जुलाई 2026 में पूरी हुई थीं अंतिम दलीलें
जानकारी अनुसार, मामले में 2 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी हो गई थीं। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। करीब 1133 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया।
2023 में सामने आया था मामला
बता दें यह मामला जनवरी 2023 में उस समय चर्चा में आया था, जब महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगाए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जांच कर चार्जशीट दाखिल की थी। 20 जुलाई 2023 से बृजभूषण शरण सिंह नियमित जमानत पर थे। वहीं, 10 मई 2024 को अदालत ने पुलिस की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय किए थे, जिसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
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कोर्ट से बरी होने का मतलब क्या है?
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, किसी आरोपी के बरी होने का अर्थ है कि अदालत के सामने पेश किए गए सबूत आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। इसका मतलब यह नहीं होता कि अदालत ने घटना को सही या गलत घोषित कर दिया है, बल्कि फैसला उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दिया जाता है।
महिला पहलवानों के पास हाईकोर्ट जाने का विकल्प
फिलहाल कोर्ट के फैसले के बाद महिला पहलवान इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकती हैं। इसके लिए उन्हें तय समय सीमा के भीतर विशेष अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अनुमति मिलने के बाद अपील दाखिल की जा सकती है।
मामले की टाइमलाइन
- जनवरी 2023 — मामला सामने आया
- 20 जुलाई 2023 — बृजभूषण शरण सिंह को नियमित जमानत मिली
- 10 मई 2024 — कोर्ट ने आरोप तय किए
- 2 जुलाई 2026 — दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हुईं
- 127 सुनवाई के बाद — अदालत ने फैसला सुनाया

