भोपाल: जहांगीराबाद थाने में वकील से कथित मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज होने और निलंबन के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पहली बार अपना पक्ष रखा है। अहिरवार ने कहा कि पुलिसकर्मी होने के कारण वह सार्वजनिक मंच पर मामले से जुड़ी सभी बातें नहीं बता सकते, लेकिन आगे साक्ष्यों और उपलब्ध जानकारी के साथ अपनी बात सामने रखेंगे।
अहिरवार ने वीडियो में कहा कि “हम किसी गलत काम के लिए सस्पेंड नहीं हुए हैं और न ही किसी आपराधिक मामले में ये सब हुआ है।” उन्होंने कहा कि पूरा मामला जनता के सामने है और समय आने पर तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखेंगे।
महिला अधिकारी पर लगाए आरोप
वीडियो में अहिरवार ने बिना नाम लिए एक महिला अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित अधिकारी ने शुरुआत से ही वरिष्ठ स्तर पर मामले को लेकर ‘मिसगाइड और मिसइन्फॉर्मेशन’ दी। अहिरवार ने जांच पूरी होने तक उक्त अधिकारी को मामले की जांच से दूर रखने की मांग भी की।
उन्होंने जहांगीराबाद क्षेत्र की जनता और थाना स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि मुश्किल समय में साथ देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को वह समझते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह विभाग की मजबूरियों से परिचित हैं।
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क्या है पूरा मामला?
वकील राकेश रावल ने पुलिसकर्मियों पर उन्हें थाने ले जाकर डंडों से मारपीट करने का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद तत्कालीन जहांगीराबाद TI राजन अहिरवार और दो आरक्षकों यश लखेरा व राम स्वरूप के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
मामले में वकील राजन रावल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। घटना के विरोध में वकीलों ने जहांगीराबाद थाने और जिला अदालत के बाहर प्रदर्शन किया था। अब टीआई राजन अहिरवार के वीडियो के सामने आने के बाद मामले में उनका पक्ष भी सार्वजनिक हो गया है। मामले की जांच के निष्कर्ष के आधार पर आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।

