भोपाल: मप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज, सरकार की उधारी और खर्च की प्राथमिकताओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भोपाल प्रवास के दौरान पटवारी ने मांग की कि वे प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन और बढ़ते कर्ज के मुद्दे पर भी राज्य सरकार से जवाब मांगें। उन्होंने दावा किया कि मध्यप्रदेश पर करीब 6 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है और इस हिसाब से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक पर लगभग 80 हजार रुपये की देनदारी है।
पटवारी ने कहा कि प्रदेश का कर्ज राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के करीब 32.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार लगातार बाजार से कर्ज लेकर अपनी वित्तीय जरूरतें पूरी कर रही है। सितंबर माह में ही तीन चरणों में 7,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया गया। इसमें 1 सितंबर को 3,600 करोड़, 16 सितंबर को 2,500 करोड़ और हाल ही में 1,500 करोड़ रुपये की उधारी शामिल है।
वीवीआईपी सुविधाओं पर करोड़ों खर्च करने का आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार की खर्च प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर किसान फसलों के उचित दाम, युवा रोजगार और आम जनता बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार वीवीआईपी सुविधाओं पर भारी रकम खर्च कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 233 करोड़ रुपये से अधिक लागत के चैलेंजर 3500 जेट विमान और करीब 225 करोड़ रुपये के एसीएच160 हेलीकॉप्टर की खरीद का निर्णय वित्तीय प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। पटवारी ने कहा कि जब प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, तब सरकार को अपने खर्चों में संयम बरतना चाहिए।
कैग रिपोर्ट में 22 हजार करोड़ के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित
पटवारी ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मार्च 2024 तक प्रदेश में 22,049 करोड़ रुपये से संबंधित 19,897 उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे। इनमें 13,607 करोड़ रुपये के प्रमाण-पत्र नौ वर्ष से अधिक समय से लंबित बताए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कैग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की लोक ऋण और देनदारियां वर्ष 2019-20 में 2,30,572 करोड़ रुपये थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 3,97,709 करोड़ रुपये हो गईं। पटवारी ने इन आंकड़ों को आधार बनाते हुए सरकार से लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्रों का ऑडिट पूरा कराने और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल का पूरा ब्योरा देने की मांग की।
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अमित शाह से चार सवालों के जवाब मांगने की मांग
जीतू पटवारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्रदेश सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए चार सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि प्रदेश पर करीब छह लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने और प्रति नागरिक लगभग 80 हजार रुपये की देनदारी का औचित्य क्या है? लगातार लिए जा रहे बाजार कर्ज का कितना हिस्सा विकास कार्यों पर खर्च हुआ और कितना नियमित खर्चों एवं वीवीआईपी सुविधाओं पर लगाया गया? कैग की रिपोर्ट में सामने आए लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्रों का वित्तीय ऑडिट कब तक पूरा होगा? इसके अलावा छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में बच्चों की मौत, बालाघाट में कुपोषण की स्थिति और मंत्रियों एवं नौकरशाही के बीच टकराव के मामलों में राजनीतिक जवाबदेही किसकी होगी?

