मुंबई: भारत में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब इंटरनेट केवल मनोरंजन और बातचीत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और कारोबार का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसी बीच रिलायंस जियो और रिलायंस फाउंडेशन की दो अलग-अलग पहलें चर्चा में हैं। जियो जहां लोगों को मुफ्त में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सीखने का अवसर दे रहा है, वहीं रिलायंस फाउंडेशन सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से देश के लाखों परिवारों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।
12 भारतीय भाषाओं में मुफ्त AI सीखने का मौका
जियो ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 12 भारतीय भाषाओं में मुफ्त AI कोर्स उपलब्ध कराने की पहल की है। इसका उद्देश्य उन लोगों को भी नई तकनीक से जोड़ना है, जिन्हें अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध तकनीकी जानकारी समझने में परेशानी होती है।
इस कोर्स के जरिए विद्यार्थी, युवा और नौकरीपेशा लोग AI से जुड़ी शुरुआती जानकारी अपनी भाषा में प्राप्त कर सकते हैं। आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल पढ़ाई, ऑफिस के काम, व्यापार और कई डिजिटल सेवाओं में बढ़ रहा है। ऐसे में AI की जानकारी लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए स्थानीय भाषा में तकनीकी शिक्षा उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें नई तकनीक समझने और डिजिटल कौशल विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
रिलायंस फाउंडेशन की करोड़ों लोगों तक पहुंच
नीता अंबानी के नेतृत्व में काम करने वाला रिलायंस फाउंडेशन लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यक्रम चला रहा है।
फाउंडेशन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उसकी विभिन्न सामाजिक पहलों की पहुंच देश के हजारों गांवों और करोड़ों लोगों तक रही है। व्यापक स्तर पर जारी आंकड़ों में 91,500 इलाकों में 8.7 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा 54,000 से ज्यादा गांवों में 6.6 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचने के आंकड़े भी सामने आए हैं। ये आंकड़े अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधि या कार्यक्रमों से संबंधित हो सकते हैं।
फाउंडेशन के कार्यक्रमों में ग्रामीण समुदायों की जरूरतों, शिक्षा के अवसरों, स्वास्थ्य सुविधाओं और लोगों की आजीविका को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है।
धीरूभाई अंबानी की सोच से जुड़ा रिलायंस का सफर
रिलायंस समूह की शुरुआत धीरूभाई अंबानी ने की थी। उनका उद्देश्य कारोबार का विस्तार करने के साथ आम लोगों को भी आर्थिक विकास में भागीदारी का अवसर देना था।
साल 1977 में रिलायंस के IPO ने आम निवेशकों को कंपनी में हिस्सेदारी लेने का अवसर दिया। इसके बाद कंपनी ने पेट्रोकेमिकल, ऊर्जा, रिटेल और दूरसंचार जैसे कई क्षेत्रों में अपना कारोबार बढ़ाया।
मुकेश अंबानी के नेतृत्व में जियो ने दूरसंचार क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। सस्ते मोबाइल डेटा और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार से देश में डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल बढ़ा। अब कंपनी AI जैसी नई तकनीक से जुड़ी शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है।
डिजिटल शिक्षा से युवाओं को क्या फायदा होगा?
आज सरकारी और निजी क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। AI की जानकारी रखने वाले लोग पढ़ाई, जानकारी जुटाने, सामग्री तैयार करने और कई नियमित कामों में तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।
हालांकि, केवल मुफ्त कोर्स उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब लोगों के पास इंटरनेट, डिजिटल उपकरण और सीखी गई जानकारी का इस्तेमाल करने के अवसर भी होंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता, डिजिटल जागरूकता और भाषा संबंधी समस्याएं अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में स्थानीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने वाली पहलें इन बाधाओं को कम करने में मदद कर सकती हैं।
यह भी पढ़ें: अक्टूबर के बचे 15 दिनों में 10 दिन बैंकों की छुट्टी, ब्रांच जाने से पहले देख लें पूरी लिस्ट
तकनीक और सामाजिक विकास को मिल सकती है नई दिशा
जियो की डिजिटल शिक्षा पहल और रिलायंस फाउंडेशन के सामाजिक कार्यक्रम अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, लेकिन दोनों का संबंध लोगों तक सुविधाएं और अवसर पहुंचाने से है। आने वाले समय में AI का इस्तेमाल और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में जरूरी होगा कि नई तकनीक का लाभ केवल बड़े शहरों या सीमित वर्ग तक न रहे, बल्कि छोटे शहरों और गांवों के लोग भी इसका उपयोग कर सकें।

