भोपाल में मेट्रो और चौड़ी सड़कों का सपना शहरवासियों को धूल, जाम और बिजली संकट के रूप में भारी पड़ रहा है। सुभाष नगर से अयोध्या बायपास तक निर्माण कार्यों के लिए बिजली की लाइनें, खंभे और ट्रांसफार्मर शिफ्ट किए जाने हैं। इसके चलते करीब डेढ़ साल तक अलग-अलग इलाकों में सप्ताह में दो से तीन बार और तीन से छह घंटे तक बिजली कटौती की आशंका है। सवाल है कि जिस विकास का मकसद जिंदगी आसान बनाना है, उसकी तैयारी में आम आदमी की मुश्किलें क्यों बढ़ रही हैं? मेट्रो और अयोध्या बायपास को 10-लेन बनाने जैसी परियोजनाएं भोपाल की भविष्य की जरूरतों से जुड़ी हैं। बढ़ते यातायात के बीच बेहतर परिवहन व्यवस्था जरूरी है, लेकिन निर्माण के दौरान बुनियादी सुविधाएं बनाए रखना भी उतनी ही अहम जिम्मेदारी है। जब परियोजनाओं के कारण बिजली आपूर्ति और यातायात प्रभावित होने का अनुमान पहले से हो, तो वैकल्पिक इंतजाम समय रहते क्यों नहीं किए जाते? लाइन शिफ्टिंग तकनीकी रूप से जरूरी और जटिल प्रक्रिया हो सकती है। इसमें फीडर बंद करने, खंभे और तार बदलने, ट्रांसफार्मर स्थानांतरित करने तथा परीक्षण के बाद आपूर्ति बहाल करने में समय लगता है। मगर इसका अर्थ यह नहीं कि नागरिकों को लंबे समय तक अनिश्चितता में रखा जाए। बिजली कंपनी और निर्माण एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से कटौती का दायरा सीमित किया जा सकता है। इसके लिए क्षेत्रवार कैलेंडर जारी करना, पहले से सूचना देना, वैकल्पिक आपूर्ति की संभावनाएं तलाशना और काम तय समय में पूरा करना जरूरी है।
गोविंदपुरा के 220 केवी सबस्टेशन में 200 एमवीए क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत करना बिजली नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन आपूर्ति क्षमता बढ़ाना और निर्माण में बाधा बन रही लाइनों को शिफ्ट करना अलग-अलग चुनौतियां हैं। एक काम में प्रगति दूसरे की परेशानी अपने आप दूर नहीं करती। इसलिए नेटवर्क सुधार के साथ निर्माण के कारण होने वाली असुविधा कम करने पर भी ध्यान देना होगा। विडंबना यह है कि मेट्रो का पूरे शहर में नियमित संचालन कब तक शुरू होगा, इसकी स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं है, जबकि निर्माण का असर नागरिकों की दिनचर्या पर लगातार पड़ रहा है। परियोजनाओं की सफलता केवल सड़क की चौड़ाई या निर्माण की प्रगति से नहीं मापी जानी चाहिए। यह भी देखना होगा कि काम के दौरान लोगों को कितनी परेशानी हुई और उसे कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए। सरकार और संबंधित एजेंसियों को बिजली कटौती की स्पष्ट समय-सारिणी जारी करनी चाहिए, वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था करनी चाहिए और निर्माण कार्यों की समयबद्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। जनता को आश्वासन से ज्यादा ठोस राहत की जरूरत है।
जनता विकास की विरोधी नहीं है, लेकिन बेहतर भविष्य के नाम पर उसका वर्तमान बदहाल भी नहीं होना चाहिए। मेट्रो और चौड़ी सड़कें तभी प्रगति का प्रतीक बनेंगी, जब उनके निर्माण के दौरान नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े। विकास का असली उद्देश्य केवल शहर की सूरत बदलना नहीं, बल्कि नागरिकों की जिंदगी आसान बनाना है।
-मिलिंद ठाकरे

