बालाघाट: चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़े विवादों और शिकायतों को लेकर सुर्खियों में रहने वाला शासकीय जिला अस्पताल इन दिनों में मरीजों के लिए परेशानियों का केंद्र बनता जा रहा है। अब यहां पहुंचने वाले मरीज और उनके परिजन खुलकर अधिकारियों को रात्रि में अचानक निरीक्षण करने की नसीहत दे रहे हैं। क्योंकि व्यवस्था कुछ ऐसी बनी हुई है कि एक-दो दिन सुधार रहने के बाद व्यवस्था दोबारा चरमरा जाती है। जिले के दूर-दराज इलाकों से आने वाले मरीज अक्सर इसी उम्मीद में आते हैं कि जिला अस्पताल में उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी और उनका निःशुल्क उपचार होगा। लेकिन यहां आने के बाद उन्हें मानसिक प्रताड़ना और परेशानियां ही झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में वे दोबारा जिला अस्पताल में बेहतर इलाज की कल्पना भी नहीं कर पाएंगे।
महिला ने कलेक्टर को दी रात में निरीक्षण की सलाह
कलेक्टरों के निरीक्षण, निर्देश और सुधार के दावों के बीच जिला अस्पताल की जमीनी हकीकत एक वायरल वीडियो के जरिए उजागर हो गई, जब एक महिला नवागत कलेक्टर को रात्रि में अचानक निरीक्षण करने की नसीहत देते नजर आई। कलेक्टर के समक्ष शिकायतें मिलीं कि मरीजों को कभी बिस्तर के लिए भटकना पड़ता है, तो कभी समय पर उपचार नहीं मिलने से नाखुश होना पड़ता है।
इतना ही नहीं, अस्पताल में कर्मचारियों के व्यवहार और मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी असंतोष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कलेक्टर के निरीक्षण और प्रशासनिक सख्ती का असर जिला अस्पताल की व्यवस्था पर कब दिखाई देगा?
पहले भी हुए निरीक्षण, फिर क्यों नहीं हुआ स्थायी सुधार?
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर है, उनकी कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें सामने आना चिंता का विषय है। मरीज और उनके परिजन इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यदि उन्हें बिस्तर, समय पर उपचार और जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़े, तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए संवेदनशीलता और सहयोग बेहद जरूरी है। ऐसे में यदि उन्हें उचित व्यवहार के बजाय परेशानी का सामना करना पड़े, तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
भोजन और कर्मचारियों के व्यवहार पर भी सवाल?
अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन यदि मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण को लेकर शिकायतें हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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अब नए कलेक्टर से सुधार की उम्मीद
आखिर मरीजों के नाम पर उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप मिलता भी है या नहीं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि पूर्व में भी तत्कालीन कलेक्टर मृणाल मीणा और कुमार सत्यम ने निरंतर जिला अस्पताल का अचानक निरीक्षण किया, लेकिन पूर्व कलेक्टरों के निरीक्षण के बाद भी यदि वर्तमान कलेक्टर आदित्य सिंह के समक्ष शिकायतें सामने आती हैं, तो यह उन अधिकारियों के लिए शर्मनाक बात होगी, जिन्हें व्यवस्थाओं में सुधार लाने के सख्त निर्देश दिए गए थे। कलेक्टर का निरीक्षण तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका असर अस्पताल के बिस्तरों, उपचार, भोजन की गुणवत्ता और कर्मचारियों के व्यवहार में दिखाई दे।
बालाघाट जिला अस्पताल में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को केवल आश्वासन नहीं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं चाहिए। अब जरूरत है कि कलेक्टर आदित्य सिंह जिला अस्पताल में बेहतर सुविधा व प्रशंसनीय व्यवस्था मिलने के दावे की मजबूत कील ठोककर दिखाएं? अन्यथा बात यही दोहराती रहेगी कि कलेक्टर आए और चले गए, लेकिन जिला अस्पताल की व्यवस्था जस की तस है!

