Saturday, October 31, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsगुलाबगंज क्षेत्र में गौ सेवा दल कर रहा है गौ माता की...

गुलाबगंज क्षेत्र में गौ सेवा दल कर रहा है गौ माता की सेवा

गुलाबगंज: गौ माता की सेवा मानवता, धर्म और समृद्धि का आधार सनातन संस्कृति में गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि ‘माता’ का दर्जा दिया गया है। वेदों और पुराणों में उल्लेख है कि गौ माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए, जो लोग निस्वार्थ भाव से गौ माता की सेवा करते हैं, वे न केवल एक पुण्य कार्य कर रहे हैं, बल्कि समाज और प्रकृति के कल्याण में भी अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं।

उसी क्रम में गुलाबगंज क्षेत्र के समाजसेवी सुमित राय जो राय वस्त्रालय के संचालक भी है ने अपने साथियों से मिलकर गौ रक्षा दल बना रखा है जहां भी क्षेत्र में गौ माता कोई दुर्घटनाग्रस्त होती है या फिर किसी बीमारी से पीड़ित होती है तो पूरी टीम उसका उपचार करती है और लोडिंग ऑटो में उनका सवार करके अस्पताल तक पहुंचाने का यह काम गत 3 साल से चल रहा है वहीं गायों की सीगो पर रेडियम लगाने का भी कम इस संस्था द्वारा किया गया है क्योंकि रात्रि में बरसात के मौसम में गौ माता एवं अन्य पशु रोड पर बैठ जाते हैं और वाहन चालकों को देखते नहीं हैं और दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं इस कारण रेडियम लगाने का काम भी इस क्षेत्र में किया गया था जिससे दुर्घटनाओं में कभी आई थी सुमित राय ने इस वर्ष सर्दी के मौसम में गौ माता के लिए 40 कंबल दान देने की घोषणा की है जिससे कि उन्हें सर्दी की ठंडी हवाओं से बचाया जा सके।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति गौ माता की सेवा करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
समाज सेवी सुमित राय का कहना है कि गौ सेवा करने से सीधे तौर पर सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सुबह उठकर गाय को पहली रोटी खिलाना, उन्हें हरा चारा देना और उनकी पीठ सहलाना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और ग्रहों के दोषों को शांत करता है।

गौ सेवकों को समाज में अत्यंत आदरणीय माना जाता है क्योंकि उनका हृदय करुणा और जीव-दया से भरा होता है।गौ सेवक केवल धर्म का पालन नहीं करते, बल्कि वे अनजाने में पर्यावरण के सबसे बड़े रक्षक बन जाते हैं। गौ रक्षा दल से जुड़े समाजसेवी राजकुमार रैकवार का कहना है कि गाय के गोबर और गोमूत्र से बनने वाली खाद और कीटनाशक भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाते हैं। गौ सेवक इस परंपरा को जीवित रखकर रासायनिक खादों के जहर से धरती को बचा रहे हैं।

देसी गायों का संरक्षण करने से प्रकृति का चक्र संतुलित रहता है। सच्चे गौ सेवक समाज को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करते हैं। आज के समय में गौशाला चलने वाले लोग दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र (पंचगव्य) से दवाइयां, साबुन, धूपबत्ती और मूर्तियां बनाकर स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

गौ सेवा दल को सहयोग करने वाले विनीत सुहाने का कहना है कि सड़कों पर प्लास्टिक खाने को मजबूर और दुर्घटनाओं का शिकार होने वाली बीमार व बूढ़ी गायों को आश्रय देकर गौ सेवक नागरिक धर्म का पालन करते हैं।आज के आधुनिक युग में गौ सेवा का मार्ग आसान नहीं है। गौ सेवकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।चारे और चिकित्सा के बढ़ते दामों के कारण गौशालाओं को चलाना मुश्किल होता जा रहा है। युवा पीढ़ी का इस सेवा भाव से दूर होना एक बड़ी चुनौती है।

यह भी पढ़ें: न स्कूल, न सड़क, न साफ पानी, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ईंदावाड़ी के कोड़ी मोहल्ला में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

मेडिकल लाइन से जुड़े गौ सेवा को के संबंध में संजय बड़ोदिया का कहना है कि गौ माता की सेवा साक्षात नारायण की सेवा है। जो लोग अपना समय, धन और श्रम गौ सेवा में लगाते हैं, वे समाज के असली नायक हैं। यदि हम प्रत्यक्ष रूप से गाय नहीं पाल सकते, तो हमें अपने आस-पास की गौशालाओं में आर्थिक सहयोग देकर या बेसहारा गायों की मदद करके इन गौ सेवकों के हाथ मजबूत करने चाहिए। सुमित राय द्वारा सर्दी के मौसम में 40 गायों के लिए कंबल वितरण करके उन्होंने सेवा भाव का नजरिया पेश किया है।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

25 to 31 October 2026
18 to 24 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन