सागर: बुंदेलखंड के सागर जिले के उत्तर और दक्षिण वन मंडल का जंगल तेंदुओं के लिए मौत का जाल बन चुका है। एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 2 साल में जिले में 7 तेंदुओ की मौत हुई हैं। इनमें 5 की मौत नेशनल हाईवे 44 पर वाहनों की टक्कर से हुई है हांलाकि, प्रोफेशनल शिकारी भी यहां काफी सक्रिय हैं।
दक्षिण वन मंडल के ढाना रेंज में करंट से बाघ के शिकार मामले में जांच ही आगे नहीं बढ़ी। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सहित जिले के जंगलों में 80 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है। इनकी तादाद लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा को लेकर न तो कोई ठोस कार्ययोजना है और न ही जिम्मेदार गंभीर हैं।
डेथ हाईवे बन गया एनएच-44
उत्तर और दक्षिण वन मंडल से होकर गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-44 मालथौन से नरसिंहपुर तक लगभग 162 से 170 किलोमीटर के दायरे में फैला है। यह हाईवे जंगल को दो हिस्सों में बांटता है। इस हाईवे पर तेंदुओ की मौत सुबह 2 से 4 बजे के बीच हुई है, जब वाहनों की गति सबसे अधिक होती है और दृश्यता कम होती है।
सड़क पर खून से सने मिले शव, हड्डियां टूटी
18 अक्टूबर 2026 को मालथौन वन परिक्षेत्र में इटवा और बरोदिया के बीच 10 मीटर तक घिसटे हुए तेंदुए का शव मिला। हड्डियां चकनाचूर थीं। 11 दिसंबर 2024 को एनएच 44 पर गुरु चोपड़ा बरकोटी घाटी पर तेंदुए को वाहन रौंदते हुए निकल गया। 12 नवंबर 2025 को गौरझामर रोड रानगिर तिराहा पर अज्ञात वाहन ने तेंदुए को रौंद दिया।
दिसंबर और जनवरी 2024 में दो और तेंदुओं की मौत हुई। दोनों के एनएच-44 पर ही खोपड़ी और मुंह पर चोट के निशान थे।
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करंट और शिकार से मौत के मामले आए
सागर जिले में हादसों के अलावा कुओं और टेरिटोरियल फाइट के नाम पर वन्यजीवों की मौत के मामले दबाए जा रहे हैं। सानौधा के आमोदा में कुएं में तेंदुए का शव मिला, तो बरायठा में तेंदुए की मौत को टेरिटोरियल फाइट बता दिया गया। राहतगढ़ में भोपाल के डॉक्टर को पॉइंट 22 गन व काले हिरण के मांस के साथ दबोचा गया, जिससे मुंबई तक मांस सप्लाई का खुलासा हुआ। वहीं, ढाना में करंट से बाघ की मौत की जांच ठप है।

