रीवा: आजादी के 78 साल बाद भी रीवा जिले के गांव सड़क के लिए तरस रहे हैं। त्योंथर विधानसभा के ढखरा गांव में सड़क न होने से एक बीमार आदिवासी महिला को एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। परिजनों को खाट की डोली बनाकर डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ा।
क्या है पूरा मामला
शनिवार को ढखरा निवासी गजरूप आदिवासी की 45 वर्षीय पत्नी राबिया आदिवासी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने एंबुलेंस को कॉल किया। एंबुलेंस मुख्य मार्ग तक तो आ गई, लेकिन गांव तक जाने के लिए सड़क ही नहीं थी। कीचड़ और पगडंडी वाले रास्ते में वाहन आगे नहीं बढ़ सका।
महिला की हालत बिगड़ती देख परिजनों ने खाट की डोली बनाई। राबिया को उस पर लिटाकर कंधे पर उठाया और करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचे। वहां से एंबुलेंस से उसे अस्पताल ले जाया गया।
सालों से मांग, सुनवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के लिए कई सालों से मांग कर रहे हैं। विधायक सिद्धार्थ तिवारी की जनसुनवाई से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक आवेदन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ढखरा ही नहीं, जिले में दर्जनों गांव आज भी मुख्य मार्ग से नहीं जुड़े हैं।
समाजसेवी ने उठाए सवाल?
समाजसेवी बीके माला ने कहा, 21वीं सदी में विकसित भारत की बात हो रही है, लेकिन गांव में सड़क तक नहीं है। यह दुर्भाग्य है। आदिवासी महिला को समय पर इलाज नहीं मिला, इससे बड़ी विफलता क्या होगी।
प्रशासन ने कहा – जांच कराएंगे
त्योंथर जनपद सीईओ प्रवीण बंसोड ने कहा कि घटना का वीडियो सामने आया है। मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

