तिरुवनंतपुरम। स्थानीय निकाय चुनावों में करारी हार के बाद केरल की सहयोगी पार्टी बीडीजेएस और बीजेपी के रिश्तों में खटास खुलकर सामने आ गई है। 300 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़कर महज पांच सीटें जीतने वाली बीडीजेएस अब गठबंधन बदलने पर गंभीर मंथन कर रही है।
स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने एनडीए गठबंधन के भीतर छिपी असंतुष्टि को सतह पर ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में शामिल भारत धर्म जन सेना (बीडीजेएस) को उम्मीद थी कि साझा रणनीति का लाभ मिलेगा, लेकिन नतीजे इसके बिल्कुल उलट आए। पार्टी ने लगभग 300 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन जीत सिर्फ पांच सीटों तक सिमट गई।
बीडीजेएस का आरोप है कि इस हार की सबसे बड़ी वजह बीजेपी का अपेक्षित सहयोग न मिलना रहा। पार्टी नेताओं का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बीजेपी का प्रभाव मजबूत था, वहां भी बीडीजेएस उम्मीदवारों को संगठनात्मक समर्थन नहीं मिला। तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन इसका बड़ा उदाहरण है, जहां एनडीए ने सत्ता हासिल की, लेकिन बीडीजेएस अपनी चारों सीटें हार गई।
कोच्चि कॉर्पोरेशन में हालात और निराशाजनक रहे। 13 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी अपनी सिटिंग सीट भी नहीं बचा सकी। कोझिकोड कॉर्पोरेशन और कोट्टायम जिले के पल्लिकथोडु पंचायत में भी बीडीजेएस को भारी नुकसान झेलना पड़ा। यहां बीजेपी ने बीडीजेएस की सिटिंग सीट पर कब्जा कर लिया, जिससे पंचायत का शासन ही हाथ से निकल गया।
आलप्पुषा के कोडमथुरुथ पंचायत में, जहां एनडीए का दबदबा माना जाता था, वहां बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। नतीजतन, पिछली बार सात सीटें जीतने वाला गठबंधन इस बार छह सीटों पर सिमट गया। बीडीजेएस नेताओं का यह भी कहना है कि राज्य की 140 विधानसभा सीटों में से करीब 100 सीटों पर उन्हें प्रतिनिधित्व तक नहीं दिया गया।
हालांकि पहले भी बीडीजेएस की नाराजगी सामने आती रही है, लेकिन तुषार वेल्लापल्ली और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के करीबी संबंधों के चलते मामला शांत हो जाता था। अब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में पार्टी का एक बड़ा गुट मानता है कि बार-बार उपेक्षा सहकर गठबंधन में बने रहना नुकसानदेह होगा।
इसी सिलसिले में पार्टी नेताओं ने एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया है। संभावना जताई जा रही है कि एसएनडीपी मध्यस्थता कर सकता है, लेकिन यह भी साफ है कि सामुदायिक संगठनों की अनदेखी आगामी विधानसभा चुनावों में एनडीए को भारी पड़ सकती है।
बीजेपी की सहयोगी पार्टी बीडीजेएस की करारी हार, बीजेपी से नाता तोड़ने की दी चेतावनी


