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विस्थापितों का दर्द बांटने कलेक्टर बैठे जमीन पर, पार्थ की संवेदनशीलता ने जीता ग्रामीणों का दिल

छतरपुर। बुंदेलखंड क्षेत्र जो हमेशा ही पानी की समस्या से जूझता रहा है, इसी समस्या को हल करने के लिए केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का परिकल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी, जिसे बीते साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसकी आधारशिला रखी और क्षेत्र में आशा जगी कि सदियों पुरानी समस्या का निराकरण होगा। लेकिन यह महत्वाकांक्षी योजना लोगों के लिए परेशानी का कारण इस लिए बन गई क्योंकि भूमि अधिगृण ने रोजगार का संकट खड़ाकर दिया है। जिसकी सुनवाई करने पहुंचे जिला कलेक्टर जमीन पर बैठकर लोगों की समस्या सुनी तो लोग भावुक हो गए।
केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित ढोड़न और डुगरिया गांवों में कलेक्टर पार्थ जैसवाल जन चौपाल लगाई। जन चौपाल में विस्थापित परिवारों ने मुआवजा, पुनर्वास और नई आबादी भूमि से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। इस दौरान कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कहा कि 18 वर्ष से अधिक आयु के वे पात्र लोग, जिनका नाम किसी कारणवश मुआवजा सूची में शामिल नहीं हो पाया है, उनका पुनः परीक्षण किया जाएगा और उन्हें भी मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
मिले जमीन का पट्टा
विस्थापित परिवारों को नई आबादी भूमि मालिकाना हक दिलाने के लिए नियमानुसार पट्टा प्रदान किया जाएगा। ग्रामीणों की मांग पर कलेक्टर ने यह आश्वासन देते हुए कहा कि गांव के देवी देवताओं की नए स्थान पर विधि-विधान से स्थापना की जाएगी, ताकि लोगों की आस्था बनी रही।
टास्क फोर्स का होगा गठन
विस्थापन से जुड़ी समस्याओं का उचित हल निकालने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स के गठन की जानकारी भी दी। कलेक्टर ने बताया कि अब तक लगभग 90 प्रतिशत मुआवजा वितरण का कार्य पूरा किया चुका है। साथ ही शेष छूटे हुए प्रकरणों का भी शीघ्र निराकरण किया जाएगा।

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