देवी तालाब मामले में एनजीटी का सख़्त रुख, कार्रवाई पर रोक से इनकार

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बालाघाट। नगर के ह्रदयतल में स्थित शासकीय देवी तालाब को अतिक्रमणमुक्त कर उसके मूल स्वरूप में स्थापित किये जाने के सम्बन्ध में बालाघाट नगर के जागरूक नागरिक द्वारका नाथ चौधरी और प्रदीप परांजपे की ओर से एनजीटी भोपाल में दायर की गई याचिका की दिनांक 12/01/2026 को सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान याचिका में हस्तक्षेपकर्ताओं के अधिवक्ता रविकांत पाटीदार की ओर से एनजीटी के मूल याचिका को ख़ारिज करने की मांग की गई जिसे एनजीटी द्वारा नकार दिया गया और कहा गया कि यह याचिका पर्यावरण से सम्बंधित है इसलिए याचिका की सुनवाई और आवश्यक आदेश भी पारित किये जायेंगे।

क्या कहा हस्तक्षेपकर्ताओं ने

याचिका में सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से एनजीटी के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा गया कि- देवी तालाब जिसका रकबा 16.14 एकड़ है, वह निजी संपत्ति है। जिसका निर्णय पूर्व में सिविल न्यायालय, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से हो चूका है। एनजीटी में वर्ष 2015 को किशोर समरीते द्वारा प्रस्तुत याचिका में भी हो चूका है और इस याचिका के याचिकर्ताओं द्वारा इस सम्बन्ध में उच्च न्यायालय जबलपुर में एक जनहित याचिका दायर कर रखी है, जिसे दृष्टिगत रखते हुए याचिका को ख़ारिज करने की मांग की गई। जिसे एनजीटी के द्वारा याचिका में पर्यावरण का मुद्दा होने से ख़ारिज करने से मना कर दिया गया।

एनजीटी में द्वारका नाथ ने की पैरवी

याचिका की दिनांक 12/01/2026 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता धरमवीर शर्मा राज्य से बाहर होने के कारण भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हो सके, तो उन्होंने एनजीटी से अनुमति ली और द्वारका नाथ चौधरी ने याचिका में पैरवी की। जिसमे उन्होंने एनजीटी को बताया कि- देवी तालाब में दो मुद्दे है, पहला पर्यावरण की सुरक्षा और दूसरा राजस्व अभिलेखों में त्रुटी सुधार है। उन्होंने पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की है और राजस्व अभिलेखों की त्रुटी सुधार के लिए उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका दायर की है।

उन्होंने एनजीटी को बताया कि- बालाघाट तहसील के राजस्व अधिकारियों ने पूर्व में उच्च न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए 3 डिसमिल के स्थान पर 16.14 एकड़ भूमि निजी हक़ में दर्ज कर दी थी। जिसकी जांच एक शिकायत में तत्कालीन तहसीलदार बालाघाट रामबाबू देवांगन के द्वारा वर्ष 2020 में की गई थी। अपने जांच प्रतिव्दन में उन्होंने बताया था कि शिकायत में दर्शित भूमि खसरा नंबर 319 के वर्तमान में 123 बतांकन है, जो देवी तालाब के नाम से जाना जाता है, जो कि मध्यप्रदेश सरकार के नाम से वर्ष 1985 तक दर्ज थी। उसके पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पारित निर्णय और डिक्री की प्रथमदृष्टया त्रुटिपूर्ण विवेचना कर तहसीलदार बालाघाट द्वारा 3 डिसमिल भूमि के स्थान पर सम्पूर्ण 16.14 एकड़ भूमि का नामांतरण कर दिया। जिसकी अपील भी की गई, किन्तु अपीलीय आदेश दिनांक 26/05/1986 के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। जिससे शिकायत में दर्शित भूमि खसरा नंबर 319 जो पूर्व मालगुजार के वारिसो के नाम दर्ज हो गई उससे उनके द्वारा अन्य व्यक्तियों को विक्रय कर दिया गया है और उसके पश्चात् उक्त भूमिस्वामियों द्वारा प्लाटिंग कर विक्रय किया, जो वर्तमान 123 भूमिस्वामियों के नाम से दर्ज है। शिकायत में दर्शित भूमि में खसरा नंबर 319 रकबा 16.14 एकड़ मध्यप्रदेश शासन शासकीय तालाब (देवी तालाब) मद की रही है और माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की त्रुटिपूर्ण विवेचना के कारण हुए नामांतरण से किसी भी पक्षकार को शासकीय भूमि पर किसी प्रकार स्वत्व प्राप्त नहीं होता है।

इस कारण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बालाघाट के राजस्व अपील क्रमांक 42 अ-6/वर्ष 1984-1985 बोलूमल, अन्य 16 बनाम जुल्फेकार अहमद और अन्य 18 में पारित आदेश दिनांक 26/05/1986 के आधार पर खसरा नंबर 319 के 2 बटांकन माननीय उच्च न्यायालय में अपीलार्थी नारायण सिंह के नाम पर 0.020 और उमराव भी के नाम पर 0.004 है। शेष समस्त बटांकनो को शासकीय दर्ज करने की कार्यवाही किया जान उचित होगा। तत्कालीन तहसीलदार बालाघाट रामबाबू देवांगन द्वारा वर्ष 2020 में प्रस्तुत प्रतिवेदन पर कलेक्टर बालाघाट की ओर से कोई कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण याचिकर्ताओं के द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में राजस्व अभिलेखों की त्रुटी सुधार को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। जो वर्तमान में विचाराधीन है, जिसमे कलेक्टर बालाघाट की ओर से 15 महीनों के बाद स्टेटस रिपोर्ट जमा की गई है।

याचिका के पहले आदेशों पर नहीं रोक

एनजीटी भोपाल के द्वारा याचिका में सुनवाई के दौरान दिनांक 23/09/2025 और दिनांक 10/11/2025 को आदेश जारी कर देवी तालाब से अतिक्रमण हटाने और दूषित पानी को तालाब में जाने से रोकने के लिए कलेक्टर बालाघाट एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगरपालिका परिषद बालाघाट को निर्देशित किया था। दिनांक 12/01/2026 को एनजीटी भोपाल के द्वारा सुनवाई के दौरान इन आदेशों पर रोक नहीं लगाईं गई है। पूर्व आदेशों के पालन में देवी तालाब की साफ़-सफाई और दूषित पानी तालाब में जाने से रोकने की कार्यवाही किया जाना आवश्यक है। यदि एनजीटी द्वारा पूर्व में जारी आदेशों का पालन नहीं किया जाता तो यह एनजीटी के आदेशों की अवमानना होगी।

दिनांक 25/03/2026 को प्रस्तुत करना है जवाब

एनजीटी भोपाल द्वारा दिनांक 12/01/2026 को सुनवाई करते हुए कहा कि- याचिका निर्णय स्थिति में है, इसलिए याचिका में जुड़े नवीन प्रतिवादी के साथ सभी प्रतिवादियों को समय पर जवाब प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया है। ताकि दिनांक 25/03/2026 याचिका को गुण-दोषों के आधार पर निराकृत किया जा सके।  साथ ही याचिकाकर्ताओं को निर्देशित किया है कि दिनांक 25/03/2026 को उच्च न्यायालय में जनहित याचिका की क्या स्थिति है, उससे अवगत कराए।

लटका शासन और नगरपालिका का जवाब

याचिका में शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता द्वारा जवाब प्रस्तुत किया गया किन्तु जवाब में तकनीकी त्रुटी होने से संशोधन के साथ जवाब प्रस्तुत करने में समय माँगा गया, जिसे एनजीटी द्वारा स्वीकार किया गया। वही नगरपालिका बालाघाट द्वारा प्रस्तुत जवाब पर एनजीटी ने कोई सुनवाई नहीं की।

यह बने हस्तक्षेपकर्ता

एनजीटी भोपाल में प्रचलित याचिका क्रमांक 130/2025 में ऋषभ डेवलपर्स के भागीदार महेंद्र सुराना, सोहन वैध, अशोक बजाज, मनीष सचदेव, किरण सोनी, दीपक सावलानी, महेश कुमार छाबरा, बसंत कांकरिया, सविता देवी फोटानी, सुनील सचदेव और गोपाल दास मंगलानी हस्तक्षेपकरता बने है और यही लोग उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रचलित जनहित याचिका क्रमांक WP/22409/2024 में भी पक्षकार बनने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है जो अभी निराकृत नहीं हुआ है।