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अस्पताल में घंटों मां के शव के पास बैठा रहा मासूम, एटा की कहानी रुला देगी

एटा। उत्तरप्रदेश के एटा से एक ऐसी तस्वरी सामने आई जिसने मानवता को ही झकझोर दिया। दिल को हिला देने वाली यह तस्वरी 10 वर्षीय बच्चे की है, जो अपनी मृत मां के शव के पास बदहवास हालत में बैठा है। घंटों इंतजार करने के बाद भी न तो कोई रिश्तेदार पहुंचा और नहीं मानवता का ढिढोरा पीटने वाली कोई सामाजिक संस्था। मासूम ही मां के शव का पोस्टमार्टम होने का इंतजार करता हुआ दिखाई दिया।
महज 10 साल का एक बच्चा, जो खुद अभी मां की गोद में होना चाहिए था, अपनी मां का पोस्टमॉर्टम करवा रहा था। कफन में लिपटी मां की लाश के पास बैठा बिलखता रहा। कभी नन्हीं आंखें मां के चेहरे को निहारती, कभी कांपते हाथों से अपने ही आंसू पोंछता। उसकी सिसकियों में ऐसा सन्नाटा और दर्द का समंदर था, जो वहां मौजूद हर किसी का इंसान के हृदय ही नहीं पूरी इंसान को भावनाओं में डुबो दिया।
शव परिक्षण कराने के लिए खड़े पुलिसकर्मी और लोग भी खुद को संभाल नहीं पाए। एक शख्स ने आगे बढ़कर बच्चे के कंधे पर हाथ रखा, जैसे उस टूटे हुए भरोसे को थामने की कोशिश कर रहा हो। लेकिन कौन भर सकता था उस खालीपन को? बच्चे के पिता की एक साल पहले एचआईवी (एड्स) से मौत हो चुकी थी। अब उसी बीमारी ने मां को भी छीन लिया। मां-बाप दोनों चले गए, और घर में बचा तो सिर्फ यह मासूम और उसकी 13 साल की बहन।
मां की लाश को कंधा देने वाला भी कोई नहीं था। पूरे 17 घंटे बाद कुछ रिश्तेदार पहुंचे, तब कहीं जाकर पंचनामा के लिए गवाह जुट पाए। हालात की बेरुखी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आखिरकार एक इंस्पेक्टर को मृत महिला के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। इस सबके बीच बच्चे ने जो कहा, वह और भी डराने वाला है। उसने अपने ही परिवार से जान का खतरा बताया। मासूम का कहना है, वे मेरी जमीन हड़पना चाहते हैं। मुझे मार सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक, 52 वर्षीय महिला लंबे समय से टीबी और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थी। उनका इलाज एटा के वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। बुधवार, 14 जनवरी की रात इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मां के इलाज से लेकर अस्पताल तक हर जिम्मेदारी उसका 10 साल का बेटा ही निभा रहा था।
बच्चे ने बताया कि मां का इलाज पहले कानपुर और फिर फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल में भी कराया गया था। लेकिन हालत में सुधार की बजाय गिरावट आती गई। आखिरकार एटा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सीएमओ के अनुसार, महिला का 2017 में टीबी का इलाज सफलतापूर्वक हो चुका था। अब यह जांच की जा रही है कि एचआईवी की पुष्टि के बाद महिला को तय मानकों के अनुसार इलाज और सुविधाएं मिलीं या नहीं।

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