सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की भेरूंदा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम भादाकुई में एक प्राइवेट फाइनेंस कंपनी द्वारा गरीब ग्रामीणों से कर्ज के नाम पर भारी ब्याज वसूले जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, ‘भगवान फाइनेंस’ नामक कंपनी क्षेत्र में छोटे लोन बांटकर ग्रामीणों को भारी कर्ज के जाल में फंसा रही है।
क्या है पूरा मामला?
मामले को लेकर ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी ₹10,000 का लोन देने के नाम पर ₹200 फाइल चार्ज वसूलती है। इसके बदले में कर्जदार को ₹600 की 20 साप्ताहिक किश्तें चुकानी पड़ती हैं। गणितीय गणना के अनुसार, मात्र 20 हफ्तों (लगभग 4.5 महीने) में ₹10,000 के बदले ₹12,000 वसूले जा रहे हैं।
ब्याज की दर देख उड़ जाएंगे होश
वित्तीय जानकारों के अनुसार, यह ब्याज दर साधारण नहीं है। यदि इसकी वार्षिक गणना की जाए तो यह प्रभावी वार्षिक ब्याज दर लगभग 153% से 180% के बीच बैठती है।

कुल लागत दर
यदि हम 200 रुपये के फाइल चार्ज को भी शामिल कर लें, तो आपकी वास्तविक लागत और भी बढ़ जाएगी। इस स्थिति में आपको मिलने वाला पैसा केवल 9,800 रुपये है, जबकि आप वापस 12,000 रुपये कर रहे हैं। इस आधार पर आपकी वार्षिक दर 180% के पार चली जाएगी।
इस लोन की साधारण वार्षिक दर 93.75% है और प्रभावी वार्षिक दर 153.24% है। तुलना के लिए, बैंकों के पर्सनल लोन आमतौर पर 10% से 20% वार्षिक दर पर मिलते हैं। आरबीआई के नियमों के अनुसार किसी भी माइक्रो-फाइनेंस संस्था के लिए ब्याज दरों की एक निश्चित सीमा तय है, जिसका यहाँ उल्लंघन होता दिख रहा है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
भादाकुई के ग्रामीणों ने प्रशासन और ग्राम भादाकुई के सरपंच धर्मेन्द्र ऊईके से इस मामले की जांच करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कम पढ़े-लिखे होने के कारण वे किश्तों के इस जाल को समझ नहीं पाते और अंततः अपनी मेहनत की कमाई ब्याज के रूप में लुटा देते हैं।


