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बालाघाट में जल जीवन मिशन घोटाले का आरोप, पूर्व विधायक किशोर समरीते ने की एफआईआर की मांग

बालाघाट। संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक किशोर समरीते ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत हुए कथित बड़े भ्रष्टाचार को लेकर वीना इंटरप्राइजेस प्रा. लि. और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग की है कि जल जीवन मिशन की राशि से खरीदी गई गांगुलपारा ढाबा के पास स्थित लगभग 20 एकड़ जमीन को सरकार जब्त कर राजसात करे तथा पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

पूर्व विधायक किशोर समरीते ने बयान जारी करते हुए कहा कि- वीना इंटरप्राइजेस प्रा. लि. को परसवाड़ा, बैहर और लांजी क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत लगभग 150 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए थे। इन ठेकों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इससे बिल्कुल विपरीत हैं।

पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन की राशि की कथित “बचत” से ठेकेदार कंपनी द्वारा फॉर्च्यूनर वाहन, गांगुलपारा ढाबा के सामने करीब 20 एकड़ जमीन, सोना-चांदी तथा अन्य अचल संपत्तियां खरीदी गई हैं, जो सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

वहीं किशोर समरीते ने कहा कि ठेके के अंतर्गत किए गए कार्य सीएसआर, स्टीमेट, ड्राइंग-डिजाइन, अनुबंध, कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति एवं प्रशासकीय स्वीकृति के अनुरूप नहीं हैं। अधिकांश योजनाएं या तो अधूरी हैं या बंद पड़ी हुई हैं। कई स्थानों पर जल स्रोत तक की पहचान नहीं की गई, जिससे ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल से वंचित हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीएचई विभाग ठेकेदार को बचाने का प्रयास कर रहा है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। समरीते ने कलेक्टर बालाघाट को आवेदन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

पूर्व विधायक ने बताया कि मध्यप्रदेश को जल जीवन मिशन के लिए केंद्र सरकार से लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई थी, लेकिन योजना के अपेक्षित परिणाम न देने और राज्यभर में असफल रहने के कारण केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 2850 करोड़ रुपये की राशि रोक ली है। यह स्थिति राज्य सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

समरीते ने कहा कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि आम जनता के मूलभूत अधिकार शुद्ध पेयजल से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो यह जनता के साथ सबसे बड़ा धोखा होगा।

 

 

 

 

 

 

 

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