ब्रह्मांड की नई झलक: हबल टेलीस्कोप ने ट्राइफिड नेबुला की शानदार तस्वीर की जारी

अमेरिका। अंतरिक्ष की अनदेखी दुनिया से एक और अद्भुत तस्वीर सामने आई है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के हबल अंतरिक्ष सूक्ष्मदर्शी ने ट्राइफिड नेबुला की एक नई और बेहद आकर्षक इमेज जारी की है,जो न सिर्फ खूबसूरत है बल्कि ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

5000 प्रकाश वर्ष दूर ‘स्टार फैक्ट्री’

ट्रिफिड नेबुला पृथ्वी से करीब 5,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक सक्रिय तारा-निर्माण क्षेत्र है। जहां गैस और धूल के विशाल बादल मौजूद हैं और नए तारों का जन्म लगातार हो रहा है। साथ ही शक्तिशाली तारों की ऊर्जा पूरे वातावरण को बदल रही है यह नेबुला वैज्ञानिकों के लिए एक ‘कॉस्मिक लैब’  की तरह है, जहां वे तारा निर्माण की प्रक्रिया को लाइव समझ सकते हैं।

नई तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बड़े और शक्तिशाली तारे अपने आसपास के गैस और धूल के बादलों को प्रभावित कर रहे हैं। तेज स्टार विंड गैस को धकेल रही हैं और पराबैंगनी विकिरण गैस को आयनित कर रहा है। इससे नए तारों के बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। कुछ जगहों पर नवजात तारे प्लाज्मा जेट्स छोड़ते दिखाई देते हैं, जो आसपास के स्पेस को और ज्यादा सक्रिय बना देते हैं।

इस तस्वीर का सबसे दिलचस्प हिस्सा एक अजीबोगरीब संरचना है, जिसे वैज्ञानिक ‘कॉस्मिक सी लेमन’ जैसा बता रहे हैं। यह गैस और धूल के घने बादलों से बनी है, जो देखने में किसी समुद्री जीव जैसी लगती है। इसके भीतर कई नए तारे जन्म ले रहे हैं। यह हिस्सा खगोलविदों के लिए खास रुचि का विषय बना हुआ है।

रंगों में छिपी है विज्ञान की कहानी

तस्वीर में देखा जा सकता है कि अलग-अलग रंग सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे वैज्ञानिक जानकारी छिपी है-

  • नीला रंग- आयनाइज्ड गैस, जहां बड़े तारों की ऊर्जा काम कर रही है
  • गहरे भूरे/काले हिस्से- घनी धूल, जहां नए तारे बन रहे हैं
  • नारंगी तारे- पूरी तरह विकसित तारे

इन रंगों के जरिए वैज्ञानिक समझ पाते हैं कि किस क्षेत्र में कौन-सी प्रक्रिया चल रही है।

30 साल बाद फिर उसी क्षेत्र का अध्ययन

जानकारी के मुताबिक, हबल टेलीस्कोप ने पहली बार 1997 में इस नेबुला की तस्वीर ली थी। अब करीब तीन दशक बाद उसी क्षेत्र की नई तस्वीर सामने आई है। इससे वैज्ञानिकों को पुराने और नए डेटा की तुलना करने का मौका मिला है। समय के साथ हुए बदलाव समझने में मदद मिली और तारा निर्माण की प्रक्रिया का विकास भी देखने को मिला है।

इस खुबसूरत तस्वीरों को देखकर वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले लाखों वर्षों में इस नेबुला की गैस और धूल धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी और तारा निर्माण रुक जाएगा। अंत में सिर्फ विकसित तारे ही बचेंगे।

 

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