बालाघाट। मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में टेंडर की शर्तों को धता बताकर जनता की गाढ़ी कमाई को सप्लीमेंटरी भुगतान के नाम पर ठिकाने लगाने का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। पूर्व विधायक किशोर समरिते ने बिजली उपकरणों की खरीदी और निर्माण कार्यों में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है सप्लीमेंटरी का शॉर्टकट?
समरिते ने अपने विस्तृत पत्र में आरोप लगाया कि मप्र पर्यटन विकास निगम, मण्डी बोर्ड, और हाउसिंग बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाया जा रहा है। उनके अनुसार, होटल निर्माण या पुलिया निर्माण के टेंडर में बिजली सामग्री का भुगतान पहले से ही शामिल होता है। बावजूद इसके, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से ’सप्लीमेंटरी बिल’ तैयार किए जाते हैं और अतिरिक्त करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया जाता है।
जबलपुर ब्रिज निर्माण में 22 करोड़ की संदिग्ध एंट्री
अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए समरिते ने जबलपुर के आधारताल से मदन महल तक बने ब्रिज का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि इस ब्रिज निर्माण में बिजली उपकरणों के नाम पर लगभग 22 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जो सीधे तौर पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। यही खेल पीडब्ल्यूडी और सेतु निर्माण विभाग के मुख्य अभियंताओं के संरक्षण में फल-फूल रहा है।
लोकायुक्त तक पहुंची शिकायत
इस कथित घोटाले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक ने पत्र की प्रतिलिपियां लोक लेखा समिति, मुख्य सचिव और लोकायुक्त पुलिस को भी प्रेषित की हैं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सरकारी खजाने को लूटने वाले सफेदपोश चेहरों को बेनकाब किया जा सके।


