नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल के मॉनसून को लेकर ऐसा पूर्वानुमान जारी किया है, जिसने देशभर में चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और कुल वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA)का लगभग 92% रहने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब है कि देश में करीब 8% कम बारिश हो सकती है,जो कृषि,जल संकट और बिजली उत्पादन पर असर डाल सकती है।
जानें क्या है वजह?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार कम बारिश के पीछे मुख्य कारण El Niño का असर है।
प्रशांत महासागर में बनने वाली यह जलवायु स्थिति भारत में मॉनसून को कमजोर कर देती है।
हालांकि, सीजन के अंत तक पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल बनने की संभावना है, जो कुछ हद तक राहत दे सकता है।
किन इलाकों में ज्यादा असर?
IMD के मुताबिक, इस बार बारिश का वितरण असमान रह सकता है जिसमें से मध्य भारत और कई मैदानी क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका, उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या ज्यादा बारिश संभव और बड़े शहरों में हीटवेव और जल संकट बढ़ने की संभावना जताई गई है।
वहीं कमजोर मॉनसून का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। जिससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है, ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है, खाद्य महंगाई में इजाफा संभव और जलाशयों तथा बांधों का स्तर भी घट सकता है।
IMD ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक पूर्वानुमान है। मई 2026 के अंत में एक और विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी, जिसमें क्षेत्रवार बारिश की सटीक जानकारी दी जाएगी।

