‘होर्मुज’ को लेकर चिंता, एक साथ बैठेंगे दुनिया के 30 देश

लंदन। दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में यहां बढ़ता तनाव सीधे तौर पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इसी खतरे को देखते हुए अब कई देश एकजुट होकर इसे सुरक्षित और सुचारू बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं।

लंदन में 30 से अधिक देशों की हाई-लेवल मीटिंग

सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन की अगुवाई में लंदन में 30 से अधिक देशों के सैन्य योजनाकारों की अहम बैठक आयोजित की गई है। यह सिर्फ एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि डिप्लोमैटिक सहमति को रियल ग्राउंड मिलिट्री प्लान में बदलने की कोशिश है। बैठक में समुद्री सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और संभावित खतरों से निपटने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है।

बता दें इस अंतरराष्ट्रीय बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज में जहाजरानी को सुरक्षित बनाना, किसी भी तरह के हमले या अवरोध को रोकना, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई को बिना रुकावट जारी रखना है। बताया जा रहा है कि यह मिशन ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में चलाया जाएगा, जिसमें कई देश सैन्य सहयोग देने को तैयार हैं।

क्यों जरूरी है होर्मुज जलडमरूमध्य?

दरअसल यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। जो कि वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्था इससे सीधे जुड़ी है। यहां कोई भी तनाव तेल की कीमतों और बाजारों को हिला सकता है

हाल ही में करीब 50 देशों की वर्चुअल मीटिंग भी हो चुकी है, जिसमें भारत समेत कई बड़े देश शामिल हुए थे। इसे एक तरह से वैश्विक एकजुटता का संकेत माना गया, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है।

किन मुद्दों पर हो रही रणनीतिक चर्चा?

  • सैन्य क्षमताओं का आकलन
  • कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम
  • क्षेत्र में फोर्स की तैनाती
  • संभावित आपात स्थिति में रिस्पॉन्स प्लान

इस पूरे समीकरण में सबसे अहम किरदार ईरान है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके बेहद करीब स्थित है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है  क्या ईरान इस अंतरराष्ट्रीय मिशन को स्वीकार करेगा? या फिर क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ेगा?

 

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