नई दिल्ली। चर्चित आबकारी नीति मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया समेत कुल 23 आरोपियों को राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया। अदालत के विस्तृत आदेश में कहा गया कि अभियोजन पक्ष मुकदमा चलाने योग्य ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया और राजधानी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
केजरीवाल- झूठे आरोपों की परतें खुलीं
जानकारी अनुसार, फैसले के तुरंत बाद केजरीवाल ने पार्टी नेताओं के साथ रोड शो किया और मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में जांच एजेंसियों- प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो का इस्तेमाल कर उनकी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की गई। साथ ही केजरीवाल ने कहा कि- अदालत के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मामला कानूनी कसौटी पर टिक नहीं पाया। उन्होंने इसे “सच्चाई की जीत” बताया और न्यायपालिका का आभार जताया।
राजनीतिक असर और आगे की राह
बता दें इस फैसले को राजधानी की राजनीति में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। केजरीवाल ने दावा किया कि अदालत के निर्णय से उनकी और उनकी पार्टी की छवि मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि- वे अपने राजनीतिक सफर में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्ष इस फैसले के व्यापक राजनीतिक प्रभावों पर नजर बनाए हुए है। अब सवाल यह है कि यह निर्णय आगामी चुनावी रणनीतियों और दिल्ली की सियासत की दिशा को किस तरह प्रभावित करेगा।


