हरिद्वार: निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। उसका शव भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय की दुकान के अंदर रस्सी के सहारे लटका मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और कुछ दिन पहले ही चाय की दुकान लगाकर गुजर-बसर शुरू की थी। आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
चाय की दुकान के अंदर मिला शव
पुलिस के मुताबिक, भूपतवाला क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक व्यक्ति का शव चाय के खोखे के अंदर लटका होने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में हुई। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कोली इलाके की एक झुग्गी में रह रहा था और पास में ही चाय बेचने का काम करता था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
क्या था निठारी कांड?
निठारी कांड की शुरुआत 2005 में नोएडा के निठारी इलाके से बच्चों और महिलाओं के लापता होने की शिकायतों से हुई थी। 29 दिसंबर 2006 को नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 मकान के पीछे और आसपास के नाले से मानव खोपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और अन्य सामान बरामद होने के बाद मामला देशभर में चर्चा में आया। इसी मकान में सुरेंद्र कोली घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था और मकान मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर था। बाद में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।
निठारी मामले में कुल 13 मुकदमे चले। इनमें कोली के खिलाफ मुख्य आधार उसके कथित बयान और उसकी निशानदेही पर हुई बरामदगी को बनाया गया था। एक मामले में 2009 में उसे मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया।
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2023 से 2025 तक बदली कानूनी स्थिति
निठारी से जुड़े 12 मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में कोली को बरी कर दिया था। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में राज्य की अपीलें खारिज करते हुए बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा।
इसके बाद 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कोली की अंतिम लंबित आपराधिक सजा वाले मामले में दायर सुधारात्मक याचिका स्वीकार की और उसकी दोषसिद्धि को भी रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि उसी साक्ष्य के आधार पर पहले की दोषसिद्धि और बाद के 12 मामलों में बरी होने के फैसलों के बीच असंगति थी। इसके साथ ही निठारी कांड से जुड़े कोली के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों का अंत हो गया।
अब हरिद्वार में उसकी मौत के बाद एक बार फिर करीब दो दशक पुराने निठारी कांड की चर्चा सामने आ गई है।

