भोपाल: एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने 45 वर्षीय महिला की 2.96 किलो वजनी थायरॉयड ग्रंथि निकालकर मध्य भारत में रिकॉर्ड बनाया है। 25 साल से बढ़ रही गांठ के कारण महिला को सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। जटिल ऑपरेशन के बाद महिला की आवाज और कैल्शियम का स्तर सामान्य है।
महिला पिछले करीब 25 वर्षों से गर्दन में थायरॉयड की गांठ से परेशान थी। समय के साथ इसका आकार इतना बढ़ गया कि उसे खासकर सोते समय सांस लेने में दिक्कत होने लगी। इसके बाद उसने एम्स के ईएनटी एवं हेड एंड नेक सर्जरी विभाग में उपचार कराया। जांच के बाद डॉक्टरों ने पूरी थायरॉयड ग्रंथि निकालने का निर्णय लिया।
नसों और ग्रंथियों को सुरक्षित रखना चुनौती
डॉक्टरों के मुताबिक, इतने बड़े गोइटर की सर्जरी सामान्य ऑपरेशन से अधिक जटिल होती है। बढ़ी हुई ग्रंथि गर्दन की सामान्य संरचना को बदल देती है। ऐसे में आवाज नियंत्रित करने वाली रिकरेंट लैरिंजियल नर्व और कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने वाली पैराथायरॉयड ग्रंथियों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी।
डॉक्टरों ने टोटल थायरॉयडेक्टॉमी सर्जरी के जरिए पूरी 2.96 किलो की ग्रंथि निकाल दी। ऑपरेशन के दौरान कोई जटिलता नहीं आई। सर्जरी के बाद महिला की आवाज सामान्य रही और कैल्शियम की कमी भी नहीं हुई। उसे कैल्शियम सप्लीमेंट देने की जरूरत तक नहीं पड़ी।
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विशेषज्ञों की टीम ने किया ऑपरेशन
सर्जरी का नेतृत्व प्रो. डॉ. विकास गुप्ता ने किया। टीम में डॉ. गणकल्याण बेहरा, डॉ. शिवम, डॉ. देबरूप और डॉ. आयुष शामिल रहे। वहीं, एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. हरीश कुमार, डॉ. ज़ैनब अहमद और डॉ. शिखा जैन की टीम ने संभाली।
महिला की जांच और ऑपरेशन की प्रक्रिया आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पूरी की गई। स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अब थायरॉयड हार्मोन की कमी पूरी करने के लिए उसे थायरोक्सिन दवा दी जा रही है।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. नरेंद्र कोतवाल ने ईएनटी वार्ड पहुंचकर महिला से मुलाकात की और डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की विशेषज्ञ सर्जिकल क्षमता और बेहतर टीमवर्क का प्रमाण है।

