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बालाघाट में पेसा एक्ट उल्लंघन का आरोप: पंचामा–दादर में बॉक्साइट खनन को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, विधायक पर साधा निशाना

बालाघाट। जिले की बैहर विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत उकवा क्षेत्र के ग्राम पंचामा, दादर जैसे आदिवासी सरंक्षित क्षेत्र के खनिज भंडारण का खनन कर वन प्राणी से लेकर जनजीवन को खतरे में डाल दिया है। वहीं जिले की आबोहवा को दूषित कर अपनी पूंजीवादी और फासीवादी नीति के चलते प्रकृति के विनाश राजनैतिक मंशा ने आदिवासियों को उनके मूल स्थान से बेदखल करने का रास्ता साफ कर दिया है। जिसमे क्षेत्र के जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासनिक स्तर की सहभागिता से इंकार नही किया जा सकता है।

धनलोलुपता में संलिप्तता दिखाकर पेसा एक्ट का सीधा उल्लंघन किया जाना यह दर्शाता है की कहीं न कहीं राज्य शासन से लेकर केंद्र सरकार तक उद्योगपतियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाना है। चाहें इसकी कीमत जिले वासियों को जहरीले परिवेश में दमघोटू जीवन बिताना ही क्यों ना पड़ें।

यह बात विगत दिवस बालाघाट के स्थानीय सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता के दौरान जातिगत सामाजिक संगठन और कुछ राजनैतिक दलो के समर्थक द्वारा कही गई। इस दौरान विभिन्न संगठनो के पदाधिकारियों ने कहा कि- जब पेसा एक्ट बनाया गया है, तो यह आदिवासियों के लिए परफैक्ट अभी तक क्यों नही हो पाया। पंचामा और दादर से पेसा एक्ट नियमों को ताक पर रखकर बॉक्साइट खनन की अनुमति प्रक्रिया का परिपालन हेतु, उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की नीति ने ना तो आदिवासियों के हितों का ध्यान रखा है और न ही वन्यप्राणी के जीवन को सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये है।

उक्त पदाधिकारियों ने सीधा प्रहार बैहर विधायक संजय उयके पर किया। उनका कहान है कि- जब जीआर पर निर्णय लिया जा रहा था, तो संजय उयके क्या कर रहे थे। आदिवासी समाज के होने के कारण उन्हें आरक्षण का फायदा मिला और विधायक बने है। लेकिन इन्होंने आजतक विधान सभा में पेसा एक्ट के तहत आदिवासी के सरंक्षण के लिए मजबूत पक्ष नही रखा, परिणाम स्वरुप तीन बार के लगाये गये सदन प्रश्न खारिज कर दिए गए। जब जनप्रतिनिधि की आवाज सदन में नहीं सुनी जाती तो, आम जनता की ज्वलंत समस्याओं का निदान सरकार कैसे कर पायेगी। वार्ता दौरान यह भी कहा गया की 47 आदिवासी नेता आरक्षित कोटे से विधान सभा में प्रतिनिधित्व कर रहे है। इनमे से एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो टी ए सी का मुखिया बन कर आदिवासी के मूल स्थानो को सरंक्षित रखकर आदिवासी के हितो की रक्षा कर सके। टी ए सी का मुखिया सीएम को क्यों बनाया गया। जबकी बैहर पाचवे अनुसूची में आता है। यंहा की पंचायते आरक्षित है और इन्हे स्वशासन का पूर्ण अधिकार मिला है। इसके बाद भी बिना अनुमति के बॉक्साइट खनन प्रक्रिया को अंजाम देना केंद्र व राज्य सरकार की पूंजीवादी और फासीवादी नीति को उजागर करती है। जिसका पुरजोर विरोध आदिवासी संगठन व अन्य सामाजिक संगठन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी करती है। जरुरत पडेगी तो अगामी समय में आंदोलन किया जायेगा।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रवक्ता ने साफ तौर पर बैहर विधायक संजय उयके पर आरोप लगाते हुए कहा कि- संविधान की दुहाई देकर जातिगत के आधार पर आरक्षित कोटे का लाभ लेकर विधायक तो बन गये लेकिन आदिवासियों का भला ये नहीं कर पा रहे है। ऐसे नेता जिस पार्टी मे रहे चाटुकारिता करने लगते है समाज से कोई लेना देना नही है।

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि- आज आजादी के 75 साल हो चुके है, आजादी के पहले आदिवासियों की स्थिति पहले कुछ और ही थी, लेकिन अब तो प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति पद पर आदिवासी है। इन्हें आदिवासियों के हितो को लागू करने से किसने रोका है, सब राजनैतिक दलों की कठपुतली बने है। इसके लिए सभी को सडकों पर उतरना होगा और जल जंगल की रक्षा करना होगा, वरना सरकारें उद्योगपतियों के हाथ सब कुछ सौंप देंगी।

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