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सर्राफा कारोबारी अनिल कांकरिया का एक और बड़ा कारनामा: 120 करोड़ की रेलवे की भूमि पर कॉलोनी निर्माण की तैयारी, मामला पहुंचा न्यायालय

गर्रा में रेलवे, निस्तार भूमि और जिला उद्योग केंद्र की जमीन के निजी हस्तांतरण का दावा, 19 लोगों के खिलाफ सिविल वाद दायर, रेलवे ने शुरू की जांच

बालाघाट। जिले की औद्योगिक नगरी गर्रा में रेलवे एवं शासकीय भूमि के कथित अतिक्रमण और निजी हस्तांतरण का मामला चर्चा में है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये मूल्य की रेलवे की भूमि तथा शासकीय भूमि को निजी नामों पर दर्ज कराकर अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनी निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इस मामले में प्रमुख सराफा कारोबारी अनिल कुमार कांकरिया सहित 19 लोगों के विरुद्ध सिविल न्यायालय वारासिवनी में वाद दायर किया गया है।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि गर्रा स्थित रेंगाटोला रोड रेलवे अंडरपास के आसपास की भूमि, जिसमें रेलवे के विभिन्न खसरों की लगभग 16.38 एकड़ भूमि तथा शासकीय निस्तार और नाला निकासी की जमीन शामिल है, का वर्तमान बाजार मूल्य करीब 120 करोड़ रुपये है। आरोप है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में परिवर्तन कर निजी स्वामित्व में दर्ज कराई गई और अब उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

वाद में उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि वर्ष 1914-15 के रिकॉर्ड में ‘केसर हिंद सरकार रेलवे सड़क’ के नाम से दर्ज थी। शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि ऐसी भूमि बाद में निजी स्वामित्व में कैसे दर्ज हो गई। इसके साथ ही विभिन्न वर्षों में भूमि के स्वामित्व परिवर्तन और नामांतरण प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए गए हैं।

न्यायालय में दायर किया गया वाद

पटेल पोहा उद्योग के संचालक वसंत पटेल तथा गर्रा निवासी चंपाबाई गौतम द्वारा व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2, वारासिवनी के न्यायालय में व्यवहार वाद क्रमांक RCSA-257/2025 दायर किया गया है। वाद में रेलवे प्रशासन, मध्यप्रदेश शासन सहित अनिल कुमार कांकरिया एवं अन्य व्यक्तियों को पक्षकार बनाया गया है। वादियों ने न्यायालय से मांग की है कि संबंधित भूमि की सभी रजिस्ट्रियां निरस्त की जाएं तथा भूमि को पुनः रेलवे, राज्य शासन एवं जिला उद्योग केंद्र के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाए।

राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से शासकीय भूमि का निजी हस्तांतरण संभव हुआ। उनका कहना है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप यह भी है कि न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद भी संबंधित विभागों की ओर से अपेक्षित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।

रेलवे ने शुरू की जांच

वादकर्ता वसंत पटेल के अनुसार शिकायतों और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद रेलवे प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। उनके अनुसार 24 मई 2026 को रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों का एक दल मौके पर पहुंचा और आधुनिक तकनीक की सहायता से भूमि का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी, स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि तथा संबंधित पक्ष भी मौजूद रहे। शिकायतकर्ता का दावा है कि रेलवे अधिकारियों ने क्षेत्र की विस्तृत जांच की और भूमि की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया।

रेलवे भूमि पर पेट्रोल पंप की अनुमति पर भी उठे सवाल

मामले में एक अन्य विवाद पेट्रोल पंप की स्थापना को लेकर सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार रेलवे अंडरपास के निकट पेट्रोल पंप स्थापना के लिए अनुमति जारी की गई है। उनका दावा है कि निरीक्षण के दौरान रेलवे अधिकारियों ने संबंधित स्थल पर रखी गई टंकियों को हटाने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि रेलवे अंडरपास, रेलवे क्रॉसिंग और उच्च क्षमता विद्युत लाइन के निकट होने के बावजूद संबंधित स्थान पर पेट्रोल पंप की अनुमति किन आधारों पर प्रदान की गई।

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है तथा रेलवे प्रशासन द्वारा की जा रही जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, आरोपित पक्ष की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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