लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रायबरेली जिले में प्रशासन की मनमानी कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बता दें कोर्ट ने एक महिला की जमीन से जुड़े मामले में एसडीएम के आदेश को अवैध और मनमाना करार देते हुए उसे रद्द कर दिया।
बिना सुनवाई हटाया गया नाम
यह मामला रायबरेली जिले की सावित्री सोनकर, देवनंदनपुर गांव से जुड़ा हुआ है। जिसका नाम राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के मालिक के तौर पर दर्ज था। इसके बावजूद भी बिना किसी पूर्व सूचना और सुनवाई के सावित्री का नाम हटा दिया गया। जिसके बाद प्रशासन ने उस जमीन पर बने निर्माण को अवैध बताते हुए बुलडोजर से ढहा दिया। फिर यह जमीन GST विभाग को सौंप दी गई।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आलोक माथुर की सिंगल बेंच ने इसे प्रशासन की कार्यशैली को ‘अवैध’ करार दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि- 2 महीने के अंदर ही मुआवजे की राशि याचिकाकर्ता को दे दिया जाए। इतना ही नहीं, कोर्ट ने राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर संदेह जताते हुए अपर मुख्य सचिव (ACS) स्तर के अधिकारी से मामले की जांच कराने का भी आदेश दिया है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि- किसी भी नागरिक की जमीन से उसका नाम हटाना और बिना नोटिस और सुनवाई के निर्माण गिराना कानून के खिलाफ है। कोर्ट ने इसे मनमाना बुलडोजर एक्शन भी बताया और कहा कि प्रशासन कानून से ऊपर नहीं हो सकता है।
SDM का आदेश रद्द
जस्टिस आलोक माथुर ने SDM का आदेश रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹20 लाख का जुर्माना लगाया। साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल भी उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल इस तरह से निजी अधिकारों को कुचलने के लिए नहीं किया जा सकता।


