पर्थ | डेविड वॉर्नर के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद ऑस्ट्रेलिया ने नए सलामी बल्लेबाज नाथन मैकस्वीनी को चुना। घरेलू क्रिकेट के दौरान मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने वाले मैकस्वीनी को भारत के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के पर्थ टेस्ट में ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि, उनके सामने पहली ही परीक्षा दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में शामिल जसप्रीत बुमराह के रूप में थी।
डेब्यू में ही बुमराह का सामना
पर्थ में खेले गए पहले टेस्ट की पहली पारी में मैकस्वीनी ने 10 रन बनाए, लेकिन बुमराह ने उन्हें विकेटकीपर ऋषभ पंत के हाथों कैच कराकर पवेलियन भेज दिया। दूसरी पारी में भी बुमराह ने उन्हें ज्यादा देर टिकने नहीं दिया और LBW आउट कर दिया। इस बार मैकस्वीनी खाता भी नहीं खोल सके।

बुमराह के सामने ऑस्ट्रेलियाई ओपनर की मुश्किल परीक्षा
पर्थ टेस्ट में बुमराह ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई करते हुए पहली पारी में 4 विकेट लिए और ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी को शुरुआती झटके दिए। दूसरी पारी में भी उन्होंने मैकस्वीनी को जल्दी आउट कर भारत को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। भारत ने यह टेस्ट 295 रन से जीता।
सीरीज में नहीं चला मैकस्वीनी का बल्ला
मैकस्वीनी को इसके बाद एडिलेड और ब्रिस्बेन टेस्ट में भी मौका मिला, लेकिन वह बड़ी पारी नहीं खेल सके। भारत के खिलाफ तीन टेस्ट में उन्होंने छह पारियों में कुल 72 रन बनाए। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें अंतिम दो टेस्ट के लिए टीम से बाहर कर युवा सैम कोंस्टास को शामिल किया।
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मैकस्वीनी की प्रतिक्रिया
मैकस्वीनी ने बाद में कहा कि शील्ड क्रिकेट में ऐसी गेंदबाजी का अनुभव नहीं होता। बुमराह की अनोखी एक्शन और गेंदबाजी से निपटना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि इससे सीखकर आगे बेहतर प्रदर्शन करेंगे।ऑस्ट्रेलिया की टीम को वॉर्नर की जगह भरने में चुनौती का सामना करना पड़ा। बुमराह की बेहतरीन फॉर्म ने सीरीज की शुरुआत में भारत को बढ़त दिलाई।

