नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जनजातीय विरासत को सम्मान देने वाला ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मांझी-चालकी परंपरा के प्रतिनिधियों तथा ‘बस्तर पंडुम’ के विजेताओं से संवाद किया। विशेष बात यह रही कि पहली बार बस्तर के प्रतिनिधि अपनी पारंपरिक वेशभूषा में राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जहां उनका आत्मीय स्वागत और सम्मान किया गया।
बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को मिला राष्ट्रीय मंच
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह अवसर केवल सम्मान का नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता और सामाजिक परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बस्तर अपनी सांस्कृतिक धरोहर, लोक परंपराओं और जनजातीय मूल्यों के कारण देश की अमूल्य विरासत का हिस्सा है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र से विकास की नई दिशा तक
अमित शाह ने कहा कि एक समय नक्सली हिंसा के कारण बस्तर की सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही थी, लेकिन अब क्षेत्र शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बस्तर छत्तीसगढ़ के सबसे विकसित संभागों में शामिल होगा।
विकास, सुरक्षा और संस्कृति साथ-साथ
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य बस्तर में विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण को समान प्राथमिकता देना है। बेहतर बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा, रोजगार और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से बस्तर को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

