वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। व्हाइट हाउस के मुताबिक ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को H.R. 5334 को कानून बनाया। यह कानून रूस पर वैधानिक प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों का दायरा बढ़ाता है, जबकि ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है।
कानून के बाद भारत और चीन पर 100% तक टैरिफ की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि कानून लागू होते ही भारत पर 100% टैरिफ नहीं लगाया गया है। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को निर्धारित परिस्थितियों में ऐसे देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, जो रूसी ऊर्जा की खरीद जारी रखते हैं।
क्या हुआ और कब हुआ?
इस कानून पर ट्रंप ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए। इससे पहले अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने इसे मंजूरी दी थी। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को इसे 262-159 वोट से पारित किया था। इसके बाद यह राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया।
व्हाइट हाउस के अनुसार कानून रूस पर प्रतिबंध, टैरिफ और अन्य निषेधों को अधिक व्यापक बनाता है तथा ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को जारी रखता है।
रूस के किन क्षेत्रों पर निशाना?
कानून में रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े लोगों एवं संस्थाओं पर कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा रूस के रक्षा क्षेत्र से जुड़े नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले जहाजों तथा तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ पर भी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है।
इसका व्यापक उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
भारत और चीन पर 100% टैरिफ की चर्चा क्यों?
कानून राष्ट्रपति को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। भारत और चीन इस प्रावधान के संदर्भ में इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि दोनों रूस से ऊर्जा खरीदते हैं।
लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 100% टैरिफ अपने आप लागू नहीं होता। कानून राष्ट्रपति को कार्रवाई का अधिकार देता है; वास्तविक टैरिफ किस देश पर लगाया जाएगा, कब लगाया जाएगा और कितनी दर होगी, यह आगे अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगा।
क्या भारत पर अभी 100% टैरिफ लगा है?
नहीं। ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद कानून प्रभावी हो गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत से आने वाले सामान पर तत्काल 100% टैरिफ लागू हो गया है। यह कानून संभावित कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति के अधिकार का विस्तार करता है।
अब भारत के लिए अहम सवाल यह रहेगा कि अमेरिकी प्रशासन इस नए अधिकार का इस्तेमाल करता है या नहीं और करता है तो किन परिस्थितियों एवं किन उत्पादों पर करता है।
भारत के लिए क्यों अहम है मामला?
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित टैरिफ का असर भारत-अमेरिका व्यापार तथा ऊर्जा आयात की रणनीति पर पड़ सकता है। हालांकि, मौजूदा कानून को सीधे भारत पर 100% टैरिफ लगाए जाने के फैसले के रूप में देखना सही नहीं होगा।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि ट्रंप प्रशासन कानून में मिले अधिकारों को किस तरह लागू करता है और भारत समेत रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों के संबंध में आगे क्या कदम उठाता है।

