बालाघाट: भारत मुक्ति मोर्चा एवं भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, नीट परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच तथा विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि नीट-यूजी परीक्षा में सामने आई धांधलियों और अनियमितताओं ने देश के करोड़ों विद्यार्थियों का शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर किया है, इसलिए इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए केंद्र सरकार को परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करते हुए ऐसी व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके।
ज्ञापन में मांग की गई कि ईवीएम के माध्यम से होने वाले चुनावों की समीक्षा कर चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाया जाए। साथ ही वर्तमान नीट परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करते हुए मेडिकल प्रवेश परीक्षा का संचालन एम्स की निगरानी में पारदर्शी तरीके से कराया जाए। इसके अलावा देशभर में शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले विद्यार्थियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई।
संगठन ने नई शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 की व्यापक समीक्षा कर आवश्यक संशोधन करने, शिक्षा के निजीकरण, विद्यार्थियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ और बढ़ती ड्रॉपआउट दर जैसी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग भी रखी। वहीं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा परीक्षा संचालन के लिए एक पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता जताई गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नीट, एसएससी (सीजीएल) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में वर्षों से रिक्त पड़े पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग की गई।
संगठन ने विद्यार्थियों के साथ होने वाले शोषण और अवैध वसूली पर रोक लगाने, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने, देशभर में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने तथा सभी विद्यार्थियों के लिए समान और न्यायसंगत शुल्क (फीस) प्रणाली लागू करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की लगभग 52 प्रतिशत सीटों में की गई कटौती को वापस लेने की मांग करते हुए कहा गया कि इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के पर्याप्त अवसर मिल सकेंगे।
भारत मुक्ति मोर्चा और भारतीय विद्यार्थी मोर्चा ने राष्ट्रपति से मांग की है कि विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने और शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए इन सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के जिला संयोजक विशाल कुमार सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

