मुबंई। हॉरर-कॉमेडी के ट्रेंड में बड़ी उम्मीदों के साथ आई फिल्म भूत बंगला आखिरकार रिलीज हो चुकी है। लेकिन अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की यह वापसी उतनी दमदार नहीं रही, जितनी दर्शकों ने उम्मीद की थी। यह फिल्म एक पुराने भुतहा बंगले के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक फैमिली ड्रामा को हॉरर के साथ मिक्स करने की कोशिश की गई है। जो एक रहस्यमयी हवेली, भाई-बहन का इमोशनल एंगल और बीच-बीच में डराने-हंसाने की कोशिश की गई है। लेकिन यह सेटअप नया नहीं लगता और कई जगहों पर पहले देखी हुई फिल्मों की याद दिलाता है।
हॉरर कम, कन्फ्यूजन ज्यादा
इस फिल्म का सबसे बड़ा वीक पॉइंट इसका टोन है। ना सही मायनों में डर पैदा होता है, ना कॉमेडी टाइमिंग काम करती है और जोक्स कई बार फोर्स्ड लगते हैं। भूल भुलैया जैसी फिल्मों से तुलना खुद-ब-खुद हो जाती है, लेकिन यहां वही मैजिक मिसिंग है।
एक्टिंग: स्टार्स हैं, असर नहीं
- अक्षय कुमार इस बार काफी लाउड और ओवर-द-टॉप नजर आते हैं।
- वामिका गब्बी का रोल कमजोर लिखा गया है।
- परेश रावल और राजपाल यादव कुछ हद तक संभालते हैं।
- तब्बू ठीक-ठाक हैं, लेकिन यादगार नहीं।
- असरानी की मौजूदगी इमोशनल टच देती है।
बता दें आज के दौर में जहां कम बजट की साउथ और नई जेनरेशन की फिल्में कंटेंट के दम पर हिट हो रही हैं, वहीं भूत बंगला यह सवाल खड़ा करती है: क्या सिर्फ स्टार कास्ट के भरोसे फिल्म चल सकती है? क्या ऑडियंस अब रिपीटेड फॉर्मूला एक्सेप्ट नहीं कर रही? क्या हॉरर-कॉमेडी जॉनर को अब नई सोच की जरूरत है?
टेक्निकल और स्क्रीनप्ले
- फिल्म की लंबाई (लगभग 2 घंटे 45 मिनट) खिंची हुई लगती है
- एडिटिंग और स्क्रीनप्ले कई जगह ढीले हैं
- बैकग्राउंड म्यूजिक इफेक्टिव नहीं बन पाता
कुल मिलाकर, फिल्म एंटरटेन करने से ज्यादा थकाने लगती है। भूत बंगला ना तो डराती है, ना ही खुलकर हंसाती है। यह एक मिस्ड ऑपर्च्युनिटी है, जहां एक मजबूत कॉम्बिनेशन होने के बावजूद कंटेंट कमजोर पड़ गया। अगर आप पुराने स्टाइल की हल्की-फुल्की फिल्में पसंद करते हैं, तो एक बार देख सकते हैं, वरना इसे स्किप करना भी सही फैसला हो सकता है।
रेटिंग: ⭐ 1.5/5


