नई दिल्ली: भारत मंडपम में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आर्थिक प्रगति और दुनिया में BRICS की बढ़ती भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि BRICS देशों की अर्थव्यवस्थाएं, मजबूत सप्लाई चेन और स्टार्टअप इकोसिस्टम का जिक्र किया। उन्होंने BRICS को ग्लोबल इकोनॉमी की बड़ी ताकत बताया।
सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात भी चर्चा में रही। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत हुई।
BRICS की बढ़ती ताकत का किया जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS अब अलग-अलग महाद्वीपों में मौजूद देशों का बड़ा समूह बन चुका है। दुनिया की लगभग 50% आबादी BRICS देशों में रहती है, जबकि ग्लोबल GDP में इनकी हिस्सेदारी करीब 40% और ग्लोबल ट्रेड में 25% से ज्यादा है।
उन्होंने BRICS देशों की आर्थिक रफ्तार का जिक्र करते हुए कहा कि यहां “इकोनॉमिक्स की ट्रेन” दुनिया की तुलना में लगभग दोगुनी स्पीड से चल रही है।
इंफ्रास्ट्रक्चर से टेक्नोलॉजी तक भारत का फोकस
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत अपनी सप्लाई चेन को ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर काम कर रहा है। इसके साथ रोड, रेलवे, पोर्ट और एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने सेमीकंडक्टर, शिपबिल्डिंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें भारत नई क्षमताएं तैयार कर रहा है। इससे ग्लोबल कंपनियों के लिए भी भारत में निवेश और कारोबार के नए मौके बन रहे हैं।
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2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप, UPI बना उदाहरण
पीएम मोदी ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी देश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत में 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप और 120 से अधिक यूनिकॉर्न हैं। शिक्षा, हेल्थकेयर, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी टेक्नोलॉजी, डिफेंस और स्पेस जैसे क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप नए समाधान तैयार कर रहे हैं।
डिजिटल पेमेंट में UPI का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की टेक्नोलॉजी ने बड़े स्तर पर लोगों को डिजिटल फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ा है। कई दूसरे देश भी अब भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम के अनुभव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का फोकस ‘Make in India, Innovate in India और Scale for the World’ पर है। साथ ही खुले सप्लाई रूट, आसान व्यापार और देशों के बीच निवेश बढ़ाने को ग्लोबल ग्रोथ के लिए जरूरी बताया।

