नई दिल्ली:चीनी की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए लगातार सरकारी हस्तक्षेप का भी कोई खास फायदा देखने को नहीं मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक सीमा घटाने, कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति देने और बिक्री कोटा प्रणाली में बदलाव जैसे कदम उठाने के बावजूद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी जारी है। बुधवार को मिल स्तर और थोक बाजार में चीनी के दाम मजबूत रहे, जबकि कई मिलों ने कीमतों में और बढ़ोतरी कर दी।
यूपी की मिलों ने दाम घटाने से किया इंकार
सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश की अधिकांश निजी चीनी मिलें कीमतें कम करने को तैयार नहीं हैं। जिसके चलते महाराष्ट्र और गुजरात की कुछ मिलों ने भी दाम बढ़ा दिए और दो सप्ताह बाद पहली बार 5,000 प्रति क्विंटल का स्तर पार कर लिया। सप्ताह की शुरुआत से अब तक चीनी के दाम 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुके हैं। बुधवार को एक्स-मिल चीनी की कीमतें 4,900-5,100 प्रति क्विंटल के बीच रहीं। हालांकि महाराष्ट्र की सहकारी मिलों ने सरकार के कदमों के बाद शुरुआती दौर में दाम घटाए थे। हालांकि, अब वहां की मिलों ने भी कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं।
त्योहारी मांग और कम स्टॉक से बढ़ी कीमतें
व्यापारियों का मानना था कि सरकारी हस्तक्षेप के बाद कीमतें और गिरेंगी, इसलिए उन्होंने बड़े पैमाने पर खरीदारी नहीं की। इससे बाजार में “हैंड-टू-माउथ” स्थिति बन गई। वहीं, कृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे लगातार दो त्योहारों के कारण मांग बढ़ गई। व्यापारियों के पास स्टॉक कम होने और त्योहारी मांग बढ़ने का फायदा उठाकर मिलों ने इस सप्ताह कीमतें बढ़ा दीं। इन सब के अलावा ट्रकों की कमी ने भी आपूर्ति पर खासा असर डाला है।
सरकार ने किए कई हस्तक्षेप
खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर जाने के बाद खाद्य मंत्रालय ने मासिक बिक्री कोटा प्रणाली को बदलकर पखवाड़ा आधारित कर दिया। नए नियमों के तहत मिलों को आवंटित कोटे का 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह में और शेष दूसरे सप्ताह में बेचना होगा।

