कांगड़ा| हिमाचल के जंगलों से एक बार फिर डरा देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। कांगड़ा के नगरोटा बगवां इलाके में मंगलवार को लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस आग की चपेट में एक प्रसिद्ध मंदिर भी आ गया, जहाँ सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे। तेज हवाओं और आसमान छूती लपटों के बीच प्रशासन ने पूरी रात जान की बाजी लगाकर एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
जगराते की खुशियाँ खौफ में बदलीं
जानकारी के अनुसार, घटना नगरोटा बगवां के पटियालकर (धलूं) की है, जहाँ पहाड़ी पर स्थित नैना देवी मंदिर में मंगलवार शाम को भंडारे और जगराते का आयोजन था। खुशियों का माहौल तब अचानक चीख-पुकार में बदल गया जब मंदिर को चारों तरफ से घेरने वाले घने जंगल में भयानक आग लग गई। मंदिर परिसर में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत करीब 200 श्रद्धालु फंस गए थे। देखते ही देखते मंदिर के चारों ओर आग का ऐसा घेरा बना कि बाहर निकलने का हर रास्ता बंद हो गया।

तूफान ने बढ़ाई मुश्किलें
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर की ओर जाने वाली सड़क के दोनों तरफ लगभग 3 किलोमीटर का इलाका धू-धू कर जल रहा था। रेस्क्यू के दौरान अचानक चले तेज तूफान ने आग में घी का काम किया। हवाओं की वजह से लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि राहत बचाव दल को आगे बढ़ने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक चला रेस्क्यू
उपमंडल अधिकारी मुनीश शर्मा के मुताबिक, अगर प्रशासन थोड़ी सी भी देरी करता तो यह आग आसपास के 5000 लोगों की आबादी को अपनी चपेट में ले सकती थी। फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीम ने सूझबूझ से काम लिया। रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआत शाम 04:00 बजे हुई। सबसे पहले सड़क के किनारों की आग को बुझाया गया ताकि गाड़ियों के निकलने का रास्ता साफ हो सके। भारी मशक्कत के बाद टीम ने रात 09:00 बजे तक सड़क के दोनों तरफ की आग पर काबू पाने और रास्ता बनाने में कामयाब रही। जिसके बाद रात 11:00 बजे प्रायरिटी बेसिस पर सबसे पहले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को गाड़ियों में बिठाकर सुरक्षित बाहर निकाला गया। पूरी रात टीमें ग्राउंड पर मुस्तैद रहीं।

