मुरैना: जडेरुआ इंडस्ट्रियल एरिया से उठता धुआं अब सिर्फ हवा में नहीं घुल रहा, बल्कि हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र में विदेशों से आने वाले पुराने टायरों को जलाकर काला तेल निकालने वाली इकाइयां जहरीला धुआं और केमिकल युक्त पानी छोड़ रही हैं। दावा है कि इसका असर आसपास के दर्जनों गांवों की सेहत और जलस्रोतों पर पड़ रहा है। कैंसर, चर्म रोग, एलर्जी और सांस की बीमारियों से लेकर मछलियों और मवेशियों की मौत तक के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतों और प्रदर्शनों के बावजूद कार्रवाई न होने पर बीते रोंज अब हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों और फैक्ट्री संचालकों से जवाब मांगा है।
धुंए से कैंसर,चर्म रोग का याचिका में उल्लेख
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बानमोर और नूराबाद औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित कुछ फैक्ट्रियों से जहरीला धुआं निकल रहा है, जबकि केमिकल युक्त पानी आसपास के जलस्रोतों को प्रदूषित कर रहा है। इसका असर आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों पर पड़ने का दावा किया गया है।
याचिका में आरोप है कि एक फैक्ट्री ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कथित फर्जी प्रमाण-पत्र तक प्रशासन के सामने पेश किया। वहीं जहरीले केमिकल के कारण बड़ी संख्या में मछलियों और मवेशियों की मौत के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों और धरना-प्रदर्शनों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सक्रिय हुआ है और जलाशयों से सैंपल लिए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने फैक्ट्री संचालकों से मांगा जवाब
भाजपा नेता एवं याचिकाकर्ता योगेंद्र मावई ने बताया कि,ग्रामीणों की मदद से हमने कई बार जिला प्रशासन को पूरे मामले से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार हमें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
हाईकोर्ट ने हमारी जनहित याचिका स्वीकार करते हुए जिला प्रशासन, फैक्ट्री संचालकों सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी को किया जाए बंद:कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश सचिव जसवीर गुर्जर ने बताया कि, इस मामले को लेकर ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। फैक्ट्री से लिए गए सैंपल की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में यदि प्रदूषण की पुष्टि होती है तो फैक्ट्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे बंद किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों, पशु-पक्षियों और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सके।
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नियमों का उल्लंघन करने पर करेंगे कार्रवाई
मुरैना के अपर कलेक्टर अश्वनी कुमार रावत ने बताया कि, जडेरुआ क्षेत्र में टायर जलाकर तेल निकालने वाली फैक्ट्रियों की दो बार जांच की जा चुकी है। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर चार फैक्ट्रियों को सील भी किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय से प्राप्त आदेश का अध्ययन कर लिया गया है और उसके निर्देशों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा।

