Thursday, September 17, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsआईवीएफ और जेनेटिक टेस्टिंग के बावजूद थैलेसीमिया मेजर बच्चा पैदा होने का...

आईवीएफ और जेनेटिक टेस्टिंग के बावजूद थैलेसीमिया मेजर बच्चा पैदा होने का मामला: साकेत कोर्ट ने पुलिस से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के साकेत कोर्ट ने एक गंभीर चिकित्सा लापरवाही के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। आईवीएफ (IVF) उपचार और एडवांस जेनेटिक टेस्टिंग (PGT-M) के दावों के बावजूद थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चे के जन्म के मामले में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) दीपिका ठाकुर ने हाइब्रिड माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान पुलिस को आदेश दिया कि मामले की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट 28 सितंबर तक अदालत में पेश की जाए। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से  वकील राहुल कुमार और वकील आशीष कश्यप द्वारा पैरवी की गई।

क्या है पूरा मामला?

फरीदाबाद निवासी पीड़ित दंपति के अनुसार, उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए वर्ल्ड इनफर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर में डॉ. विद्या सिन्हा से इलाज शुरू कराया था। दंपति ने डॉक्टर को पहले ही अपनी मेडिकल हिस्ट्री बताते हुए स्पष्ट किया था कि उनके परिवार में अनुवांशिक बीमारियां रही हैं और पहले भी उनके दो बच्चों की मौत थैलेसीमिया मेजर जैसे गंभीर आनुवंशिक रोग के कारण हो चुकी है।

आरोप है कि डॉक्टर ने दंपति को आईवीएफ (IVF) और PGT-A व PGT-M जेनेटिक टेस्टिंग के जरिए एक पूरी तरह स्वस्थ बच्चे के जन्म का आश्वासन दिया था।

16 लाख रुपये खर्च, फिर भी बच्चा गंभीर बीमारी से पीड़ित

2023 में भ्रूण बायोप्सी और पीजीटी-एम रिपोर्ट के आधार पर भ्रूण ट्रांसफर किया गया। इसके बाद बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन बच्चे की तबीयत खराब रहने लगी। 23 जून 2025 को बच्चे को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 12 जुलाई 2025 को आई जांच रिपोर्ट में बच्चे को ‘थैलेसीमिया मेजर’ होने की पुष्टि हुई।

पीड़ित परिवार का दावा है कि बच्चे के जीवनभर चलने वाले ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन चिलेशन थेरेपी और लगातार चिकित्सा देखभाल पर अब तक करीब 16 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

डॉक्टर और सेंटर पर शिकायत, DMC की रिपोर्ट का इंतजार

शिकायतकर्ता के वकील राहुल कुमार व आशीष कश्यप का कहना है कि जब इस लापरवाही को लेकर अस्पताल और डॉक्टर से जवाब मांगा गया, तो उनकी तरफ से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद दंपति ने 2 जून 2026 को अमर कॉलोनी थाने और दिल्ली पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत दर्ज कराई।

मामले में डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई से पहले दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) की मेडिकल ओपिनियन (जांच रिपोर्ट) का इंतजार किया जा रहा है। DMC की रिपोर्ट आने और पुलिस द्वारा 28 सितंबर को स्टेटस रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कोर्ट इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय करेगा।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

13 to 19 September 2026
6 to 12 September 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन