रायपुर। छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास में 24 फरवरी 2026 का दिन केवल एक वित्तीय तिथि मात्र नहीं, बल्कि एक राज्य के ‘कायाकल्प’ के उद्घोष का साक्षी बना। नवनिर्मित विधानसभा के भव्य प्रांगण में जब वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बजट भाषण की शुरुआत अपनी माटी के तिलक से की, तो यह स्पष्ट हो गया कि साय सरकार का दृष्टिकोण केवल आर्थिक आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि भावनाओं और भविष्य का एक सुविचारित संगम है।
वित्त मंत्री ने SANKALP के जिस सप्त-ऋषि मॉडल (समावेशी विकास, अधोसंरचना, निवेश, कौशल, अंत्योदय, आजीविका और प्रभावी नीति) को पेश किया है, वह राज्य की अर्थव्यवस्था को पारंपरिक जड़ता से निकालकर आधुनिक वैश्विक मंच पर खड़ा करने की एक महत्वाकांक्षी कोशिश है। 1.72 लाख करोड़ रुपये का यह बजट आकार में 35 गुना वृद्धि के साथ यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ अब ‘संभावनाओं का प्रदेश’ होने के टैग को पीछे छोड़कर ‘उपलब्धियों का प्रदेश’ बनने की ओर अग्रसर है।
बस्तर और सरगुजा: बंदूकों की गूंज से क्लासरूम के शोर तक
इस बजट की सबसे बड़ी मानवीय संवेदना बस्तर और सरगुजा अंचल के लिए किए गए प्रावधानों में झलकती है। कभी नक्सलवाद के अंधेरे साये में रहे अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की ‘एजुकेशन सिटी’ की परिकल्पना शिक्षा के माध्यम से क्रांति लाने का एक साहसिक कदम है। यह उस विश्वास की बहाली है, जहां युवा के हाथ में गौर-सींग के साथ अब स्टेथोस्कोप और लैपटॉप भी होगा। नक्सलवाद के सूर्यास्त के दावों के बीच ओलंपिक आयोजनों और कनेक्टिविटी के लिए बजट आवंटन यह दर्शाता है कि सरकार केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि ‘सम्मान’ के जरिए मुख्यधारा को मजबूत कर रही है।
आधी आबादी और स्वास्थ्य का सुरक्षा चक्र
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में ‘महतारी वंदन’ के लिए 8,200 करोड़ का निवेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तरलता (Liquidity) सुनिश्चित करेगा। वहीं, ‘रानी दुर्गावती योजना’ के तहत बालिकाओं को उनके 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1.5 लाख रुपये की सहायता देना, सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। स्वास्थ्य के मोर्चे पर, 5 नए मेडिकल कॉलेजों का सेटअप और आयुष्मान योजना हेतु 1,500 करोड़ का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में कोई भी नागरिक बीमारी के वित्तीय बोझ तले न दबे।
नवा रायपुर और आधुनिक अधोसंरचना
रायपुर को ‘स्टेट कैपिटल रीजन’ (SCR) के रूप में विकसित करना और वहां मेट्रो रेल का खाका खींचना यह बताता है कि सरकार भविष्य के शहरीकरण की चुनौतियों के प्रति सजग है। नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई और आईटी मेटा सेंटर की योजना राज्य को ‘डिजिटल इंडिया’ के नक्शे पर एक नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। अधोसंरचना के क्षेत्र में ‘द्रुतगामी सड़क संपर्क योजना’ आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाली धमनियों का काम करेगी, जिससे व्यापार और परिवहन को नई गति मिलेगी।
अंत्योदय की ओर बढ़ता कदम
यह बजट केवल इंफ्रास्ट्रक्चर या उद्योगों के बारे में नहीं है; यह उस अंतिम व्यक्ति के बारे में है जो बस्तर के जंगलों में शहद इकट्ठा करता है या सरगुजा की पहाड़ियों पर खेती करता है। उद्योग विभाग के बजट में लगभग तीन गुना वृद्धि और ‘प्लग एंड प्ले’ फैक्ट्री मॉडल जैसे नवाचार रोजगार सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। ओ.पी. चौधरी का यह तीसरा बजट एक संतुलित वित्तीय दस्तावेज है, जो ‘मोदी की गारंटी’ को जमीन पर उतारने का संकल्प रखता है। यदि इन नीतियों का क्रियान्वयन इनकी मंशा के अनुरूप हुआ, तो विकसित छत्तीसगढ़ 2047 का स्वप्न केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातलीय हकीकत होगा। यह बजट बताता है कि जब विजन स्पष्ट हो और संकल्प मजबूत, तो राज्य अपनी नियति स्वयं लिखता है।


