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Iran Conflict: Gulf में बढ़ते तनाव के बीच France का बड़ा संकेत, शर्तों के साथ सैन्य सहयोग को तैयार

पेरिस। मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच फ्रांस ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noel Barrot ने साफ किया है कि यदि खाड़ी देशों पर हमले जारी रहते हैं तो फ्रांस अपने सहयोगी देशों के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय वैधता के दायरे में होना चाहिए और इसे United Nations Security Council में चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

खाड़ी देशों के समर्थन में फ्रांस

जानकारी के मुताबिक, पेरिस में विदेश मंत्रालय की इमरजेंसी मीटिंग के बाद बैरोट ने कहा कि- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, इराक, बहरीन, कुवैत, ओमान और जॉर्डन जैसे देशों को ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने इन देशों के साथ “पूर्ण एकजुटता” जताते हुए संकेत दिया कि फ्रांस क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए रणनीतिक और सैन्य सहयोग देने को तैयार है।

4 लाख फ्रांसीसी नागरिक Gulf क्षेत्र में

फ्रांसीसी विदेश मंत्री के मुताबिक करीब चार लाख फ्रांसीसी नागरिक खाड़ी देशों या उसके आसपास रह रहे हैं या फिलहाल वहां मौजूद हैं। ऐसे में फ्रांस की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि अबू धाबी स्थित फ्रांसीसी नौसैनिक अड्डे पर ड्रोन हमले से सीमित नुकसान हुआ, लेकिन किसी भी नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।

एकतरफा हमलों पर सवाल

बता दें फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम ने संयुक्त बयान में कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए तैयार हैं। हालांकि बैरोट ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर इजरायल और अमेरिका के शुरुआती “एकतरफा हमलों” को संयुक्त राष्ट्र में औपचारिक चर्चा के बिना पर्याप्त वैधता नहीं मिल सकती थी।

ईरान को बातचीत की सलाह

फ्रांस ने ईरान से तत्काल हमले रोकने और राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की है। बैरोट ने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति केवल कूटनीतिक संवाद और पारस्परिक समझौते से ही संभव है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य मूवमेंट और कूटनीतिक बयानबाजी के बीच यह साफ है कि वैश्विक शक्तियां अब इस संघर्ष को सीमित रखने की कोशिश में हैं, लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को लेकर और तेज बहस देखने को मिल सकती है।

 

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