ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन भव्य क्लोजिंग सेरेमनी के साथ हो गया है। समापन समारोह के दौरान 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के मेजबान शहर अहमदाबाद को आधिकारिक राष्ट्रमंडल ध्वज और बैटन सौंपे गए। हालांकि भारत के प्रदर्शन को लेकर एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जिसने खेल विशेषज्ञों और अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
39 पदक के साथ खत्म हुआ भारत का अभियान
भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल 39 पदक जीते। इनमें बॉक्सिंग सहित कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि यह आंकड़ा बर्मिंघम 2022 में जीते गए 61 पदकों से काफी कम रहा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वजह खिलाड़ियों का कमजोर प्रदर्शन नहीं, बल्कि इस बार प्रतियोगिता में शामिल खेलों की संख्या कम होना है।
कई पारंपरिक खेल रहे बाहर
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के कार्यक्रम में कई ऐसे खेल शामिल नहीं थे, जिनमें भारत का हमेशा दबदबा रहा है। इनमें- कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश, ,क्रिकेट जैसे खेल शामिल हैं। इन खेलों के बाहर होने से भारत के लिए पदक जीतने के कई अवसर कम हो गए।
टॉप-3 में पहुंच सकता था भारत
बर्मिंघम 2022 में भारत ने इन छह खेलों में करीब 30 पदक जीते थे। यदि ये प्रतियोगिताएं इस बार भी कार्यक्रम का हिस्सा होतीं और भारत पिछली बार जैसा प्रदर्शन दोहराता, तो पदक तालिका में उसकी स्थिति काफी बेहतर हो सकती थी। माना जा रहा है कि ऐसे में भारत तीसरे स्थान पर रहे कनाडा को पीछे छोड़कर टॉप-3 में जगह बना सकता था।
अहमदाबाद 2030 के लिए मिले संकेत
अब जबकि अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा, ऐसे में भारत के सामने यह बड़ा अवसर होगा कि वह अधिक से अधिक खेलों को शामिल कराने और अपने मजबूत खेलों में बेहतर प्रदर्शन के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थानों के लिए चुनौती पेश करे।

