भोपाल: मध्यप्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की समर्थन मूल्य (MSP) खरीदी के दौरान किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब जिन किसानों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट) तकनीकी कारणों से बार-बार विफल हो रहा है, वे अपनी उपज नामित प्रतिनिधि (नॉमिनी) के माध्यम से भी समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी दिक्कतों के कारण कोई भी पात्र किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ लेने से वंचित न रहे।

नई व्यवस्था में क्या होगा?
केंद्र सरकार के नए प्रावधानों के अनुसार किसान अपनी उपज बेचने के लिए एक नामित प्रतिनिधि नियुक्त कर सकेगा। हालांकि, प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं।
- किसान की पहचान का सत्यापन और फोटो अनिवार्य होगा।
- नामित प्रतिनिधि का OTP/e-KYC और बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा।
- खरीदी का पूरा भुगतान केवल किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ही किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में राशि प्रतिनिधि के खाते में नहीं भेजी जाएगी।
- यह सुविधा केवल वास्तविक और विशेष परिस्थितियों में ही उपलब्ध होगी।
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किन किसानों को मिलेगा लाभ?
इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके फिंगरप्रिंट उम्र, लगातार मेहनत, घिसे हुए निशान या अन्य तकनीकी कारणों से बायोमेट्रिक सत्यापन में सफल नहीं हो पाते थे। अब ऐसे किसान भी बिना किसी परेशानी के अपनी मूंग और उड़द की फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे।
केंद्र सरकार का यह निर्णय किसान हितों की सुरक्षा के साथ-साथ समर्थन मूल्य खरीदी प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

