इंदौर। स्वच्छता की मिसाल माने जाने वाले इंदौर शहर में दूषित पानी ने भयावह रूप ले लिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदा पानी पीने से मरने वालों की संख्या अब 18 हो चुकी है। हालात इतने गंभीर हैं कि 99 मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 16 आईसीयू में और 3 वेंटिलेटर पर जीवन से संघर्ष कर रहे हैं।
बुधवार को सामने आई एक और मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। मृतक महिला 28 दिसंबर को अपनी बेटी से मिलने भागीरथपुरा आई थी। घर लौटने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। अब तक 450 से अधिक निजी और सरकारी बोरवेल का क्लोरीनीकरण किया जा चुका है। जिस पानी की टंकी से आपूर्ति हो रही है, उसे भी अत्यधिक क्लोरीन से शुद्ध किया गया है।
कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश ;प्रशासन ने क्षेत्र के 5,013 घरों में जाकर करीब 24,786 लोगों को स्वास्थ्य किट वितरित की हैं, जिनमें ओआरएस और जिंक की गोलियां शामिल हैं। क्षेत्र में पांच एंबुलेंस 24 घंटे तैनात हैं और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर प्रभावितों को एम.वाय. अस्पताल, अरविंदो अस्पताल और बच्चों को चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। टोल-फ्री नंबर भी जारी किया गया है ताकि जरूरतमंद तत्काल मदद ले सकें।
फिलहाल इंदौर में डर का माहौल है और लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर स्वच्छता की राजधानी में पानी इतना जानलेवा कैसे हो गया?


