Sunday, November 8, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsदाना भरने के दौर में सोयाबीन पर दोहरा संकट, कीट-रोग के साथ...

दाना भरने के दौर में सोयाबीन पर दोहरा संकट, कीट-रोग के साथ नमी का असर

भोपाल:नजदीकी जिला विदिशा, रायसेन में सोयाबीन की फसल अब 75 से 80 दिन की हो चुकी है। कई खेतों में फलियों में दाना भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फसल की इस निर्णायक अवस्था में किसानों के सामने कीट-रोग के साथ नमी की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। फली छेदक, चने की इल्ली, तंबाकू की इल्ली और सेमीलूपर जैसे कीटों का खतरा बना हुआ है। वहीं – राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट, फंगस और पीला मोजेक जैसे रोग भी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कृषि जानकारों का कहना है कि इस अवस्था में खेतों की लगातार निगरानी जरूरी है। फलियों में दाना भरने के दौरान – कीटों का प्रकोप बढ़ा तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है। खासकर फली छेदक और विभिन्न प्रकार की इल्लियां फलियों को नुकसान पहुंचाकर तैयार हो रही उपज को प्रभावित कर सकती हैं।

पत्तियों पर रोग के लक्षण दिखे तो परेशानी बढ़ेगी

फसल में फंगस का प्रकोप होने पर पत्तियों की निचली सतह पर काली शिराएं दिखाई दे सकती हैं। पीलामोजेक या सोयाबीन मोजेक की स्थिति में पौधे प्रभावित होते हैं। इनके वाहक, सफेद मक्खी और एफिड, भी फसल के लिए खतरा हैं। रोगग्रस्त पौधों को समय पर खेत से नहीं हटाया गया तो संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका रहती है।

बारिश ने बढ़ाई नमी की चिंता

इस समय कीट-रोग के साथ बारिश में खेंच होने पर नमी की कमी भी बड़ी समस्या बन रही है। फलियों में दाना भरने के दौरान पर्याप्त नमी नहीं मिलने से दाने का विकास प्रभावित हो सकता है। उपज घटने का खतरा बना रहता है।

ये भी पढ़े:जम्मू-कश्मीर में जैश कमांडर ढेर: भद्रवाह में मिला शव, एम4 राइफल और अन्य हथियार बरामद

गुलाबगंज में किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें

गुलाबगंज में सोयाबीन फसल पर पीला मोजेक सहित विभिन्न रोग व कीटों के प्रकोप की स्थिति देखने को मिल रही है। इसके चलते पौधों में अपेक्षाकृत फलियां नहीं लग रही है। किसानों की ओर से लगातार आ रही शिकायतों के मद्देनजर कृषि विभाग के तकनीकी दल ने ग्यारसपुर विकासखंड के आधा दर्जन गांवों में खेतों का निरीक्षण किया साथ ही किसानों को आवश्यक सुझाव दिए। तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट रोग की शुरुआत पत्तियों पर पानी जैसे दाग के रूप में दिखाई देती है। समय पर नियंत्रण नहीं होने पर पौधे सूख सकते हैं। रोग के लक्षण दिखाई देने पर वैज्ञानिकों की सलाह पर फफूंदनाशक दवा का उपयोग किया जाना चाहिए।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन