नई दिल्ली: दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई से जुड़े तीन अहम रास्तों पर एक साथ दबाव बढ़ गया है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण Strait of Hormuz से shipping पहले ही बुरी तरह प्रभावित है। अब Yemen के Iran-backed Houthi fighters ने Red Sea के पास अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
इसी बीच Saudi Arabia ने हमलों के बाद अपनी महत्वपूर्ण East-West Oil Pipeline को भी अस्थायी तौर पर बंद कर दिया है। Saudi Energy Ministry ने बताया कि Riyadh और Madinah regions में pipeline पर कई हमले हुए थे। इसके बाद सुरक्षा जांच के लिए इसे precautionary measure के तौर पर बंद किया गया।
Red Sea में हूतियों की बढ़ी ताकत
हूतियों ने पहले Yemen के महत्वपूर्ण Mocha port पर कब्जा किया और इसके बाद Bab al-Mandeb Strait के बीच स्थित strategic Mayun यानी Perim Island तक पहुंच गए। Yemeni government forces के पीछे हटने के बाद इस island पर भी हूतियों का नियंत्रण हो गया।
Bab al-Mandeb कोई सामान्य समुद्री रास्ता नहीं है। यह Red Sea को Gulf of Aden से जोड़ता है और आगे Suez Canal के जरिए Asia-Europe trade का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है।
Saudi Arabia के लिए Pipeline क्यों थी इतनी जरूरी?
Saudi Arabia की East-West Pipeline इसलिए खास है क्योंकि यह Strait of Hormuz को bypass करने का रास्ता देती है। Pipeline देश के पूर्वी oil fields से crude को पश्चिमी Red Sea coast तक पहुंचाती है। इस pipeline से करीब 40 से 50 लाख barrels oil प्रतिदिन transport किया जा रहा था। Hormuz में संकट के बीच यही Saudi Arabia के लिए महत्वपूर्ण alternative route बनी हुई थी।
अब pipeline temporarily बंद है और दूसरी तरफ Red Sea route पर भी security risk बढ़ गया है। इसलिए Saudi oil exports और global supply को लेकर बाजार की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
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भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?
भारत अपनी crude oil जरूरत का बड़ा हिस्सा import करता है। इसलिए international market में supply कम होने या shipping महंगी होने का सीधा असर भारत के import bill पर पड़ सकता है। अगर Red Sea route ज्यादा असुरक्षित होता है तो कई ships को Cape of Good Hope के लंबे रास्ते से जाना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय, fuel consumption और freight cost बढ़ सकती है।
आगे और बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें
Middle East में बढ़ते तनाव का असर crude prices पर पहले ही दिखाई दे चुका है। 10 सितंबर को Houthi forces के Mocha पर कब्जे की खबर के बीच oil prices $105 प्रति barrel से ऊपर चले गए थे।
अब बाजार की नजर तीन चीजों पर रहेगी—Saudi pipeline कितने समय तक बंद रहती है, Bab al-Mandeb में commercial ships की आवाजाही कितनी प्रभावित होती है और Strait of Hormuz की स्थिति कब सामान्य होती है।

