सीहोर। कागज के टुकड़ों से करियर बनते हैं, लेकिन जब वही कागज़ नकली निकलें तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। सीहोर के सत्य साईं विश्वविद्यालय में छापा इसी को उजागर करता है, जहां डिग्रियां कथित तौर पर तारीख बदलकर तैयार की गईं।
सीहोर जिले के इछावर स्थित सत्य साईं विश्वविद्यालय में राजस्थान विशेष अभियान समूह (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ कई ठिकानों पर छापा मारा। यह कार्रवाई राजस्थान में वर्ष 2020 की शिक्षक पात्रता भर्ती (सीईटी/शिक्षक भर्ती परीक्षा) में शामिल 67 अभ्यर्थियों की कथित फर्जी डिग्रियों के मामले में की गई है।
जांच कर रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश मेश्राम के अनुसार, विश्वविद्यालय द्वारा इन अभ्यर्थियों को पिछली तारीखों में डिग्रियाँ जारी की गईं, जिन्हें भर्ती प्रक्रिया में उपयोग किया गया। प्रारंभिक जांच में विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड और प्रस्तुत दस्तावेजों में भारी असंगति पाई गई।
राजस्थान सरकार ने पहले भी कई बार विश्वविद्यालय से छात्रों से जुड़े रिकॉर्ड माँगे थे, लेकिन वे उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी संदेह के आधार पर विशेष अभियान समूह ने कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय परिसर और संस्थान के मालिक के आवास पर तलाशी ली। यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के प्रतिनिधि मुकेश तिवारी और अंकित जोशी ने स्वीकार किया कि राजस्थान से एक टीम दस्तावेजों के सत्यापन के लिए आई है। उन्होंने इसे सामान्य जांच बताया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि किस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा मामला है।
सूत्रों का कहना है कि टीम राज्य विशेष कार्य बल की थी और उसने बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए हैं। अभी पूरी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में जालसाजी की यह आशंका कई सवाल खड़े कर रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल सैकड़ों योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों पर चोट है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी गहरा धब्बा है।
डिग्री का सौदा और नौकरी का धोखा, सत्य साईं विश्वविद्यालय पर छापा, 67 फर्जी प्रमाणपत्रों का खुलासा


