भोपाल: पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म और हिंदुत्व को अलग बताते हुए कहा कि हिंदुत्व की तरफ जाने वालों के दिल-दिमाग में नफरत भर जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म के नाम पर हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकाल रहे दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकाल रहे हैं। राघौगढ़ पहुंचने पर उन्होंने यात्रा के दो उद्देश्य बताए- लोकतंत्र की जगह एकतंत्र का विरोध और सनातन के नाम पर हिंदुत्व को आगे बढ़ाने की कोशिशों का विरोध।
सभा में उन्होंने राम मंदिर के चंदे का हिसाब भी मांगा। साथ ही ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई।
सनातन धर्म में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है
दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म का सही अर्थ लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो लोग हिंदुत्व की तरफ चले जाएंगे। उनके मुताबिक, सनातन धर्म में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है। इसका संदेश पूरी दुनिया को एक परिवार मानने का है। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म को हिंदुत्व के रूप में पेश किया जा रहा है।
यात्रा का उद्देश्य बताया
दिग्विजय सिंह ने कहा कि 80 साल की उम्र में 1000 किलोमीटर की पदयात्रा के दो उद्देश्य हैं। पहला, देश में लोकतंत्र की जगह एकतंत्र को बढ़ावा दिए जाने का विरोध करना और दूसरा, सनातन धर्म के नाम पर हिंदुत्व को आगे बढ़ाने की कोशिशों का विरोध करना।
उन्होंने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों का उल्लेख करते हुए ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।
राम मंदिर के चंदे का हिसाब मांगा
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए करीब 1400 करोड़ रुपए के चंदे का मुद्दा उठाया। उन्होंने 1992 में महंत लालदास द्वारा लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा का विरोध किए जाने का जिक्र किया।
सिंह ने दावा किया कि महंत लालदास ने राम मंदिर के लिए जुटाई गई राशि का हिसाब मांगा था। तब 8.29 करोड़ रुपए का हिसाब बताया गया था। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं में चंदे और चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता की जरूरत बताई।
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बेटे जयवर्धन ने किया स्वागत
यात्रा के पहले पड़ाव के बाद दिग्विजय सिंह अपने गृह नगर राघौगढ़ पहुंचे। यहां उनके बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने परिवार के साथ यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद आयोजित सभा में दिग्विजय सिंह ने यात्रा के मकसद और सनातन धर्म को लेकर अपनी बात रखी।

