Sunday, October 18, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsसंपादकीय: एक मकान की हेराफेरी पकड़ी, बाकी का हिसाब कौन करेगा?

संपादकीय: एक मकान की हेराफेरी पकड़ी, बाकी का हिसाब कौन करेगा?

भोपाल: नगर निगम में एक आवासीय मकान को 150 बिस्तरों का अस्पताल बताकर संपत्ति कर 11 हजार से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये से अधिक कर दिया गया। यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। जिस यूजर आईडी को संपत्ति की श्रेणी बदलने का अधिकार नहीं था, उससे इतना बड़ा बदलाव कैसे हो गया? सिस्टम की खामी थी या नियमों को ताक पर रखकर मनमानी की गई? इसकी जवाबदेही आखिर कौन लेगा? जब एक मकान के रिकॉर्ड में इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है, तो बाकी संपत्तियों के रिकॉर्ड पाक-साफ हैं, इसकी गारंटी कौन देगा? नगर निगम में ऐसी दूसरी गड़बड़ियों की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। कहीं संपत्ति का गलत वर्गीकरण हुआ हो, कहीं क्षेत्रफल में हेरफेर या कहीं मनमाने ढंग से कर निर्धारण किया गया हो, तो इनकी पड़ताल जरूरी है। इसलिए जांच एक मकान तक सीमित रखने के बजाय सभी वार्डों में संपत्ति कर के रिकॉर्ड का व्यापक डिजिटल ऑडिट कराया जाना चाहिए।

नगर निगम की विडंबना देखिए कि आम नागरिक से टैक्स वसूलने में पूरी सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन अपने सिस्टम में गड़बड़ी सामने आने पर कार्रवाई कुछ कर्मचारियों तक सिमट जाती है। सवाल यह है कि निगरानी करने वाले अधिकारी क्या कर रहे थे? जिस व्यवस्था में अधिकारविहीन यूजर आईडी से संपत्ति की श्रेणी बदल गई, वहां जवाबदेही केवल कंप्यूटर चलाने वाले कर्मचारी की ही क्यों तय हो? निलंबन और सेवा समाप्ति के निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है। जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि रिकॉर्ड में बदलाव किसने, कब और कैसे किया? तकनीकी खामी थी तो उसे दूर किया जाए और जानबूझकर गड़बड़ी की गई तो सभी जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। साथ ही, यह भी पता लगाया जाए कि ऐसी दूसरी गड़बड़ियों से कितने नागरिक प्रभावित हुए हैं। एक मामला पकड़ में आया है, तो बाकी मामलों की जांच से परहेज क्यों? नगर निगम को संपत्ति कर के पुराने रिकॉर्ड खंगालने चाहिए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने चाहिए। जनता के पैसे से चलने वाली व्यवस्था में पारदर्शिता कोई एहसान नहीं, जिम्मेदारी है।

जनता से पाई-पाई का हिसाब मांगने वाले नगर निगम को अपने सिस्टम की गड़बड़ियों का हिसाब भी देना होगा। सवाल सिर्फ एक मकान में हुई हेराफेरी का नहीं, बल्कि यह है कि ऐसी कितनी गड़बड़ियां अब तक पकड़ से बाहर हैं और उनका हिसाब कौन करेगा?

-मिलिंद ठाकरे

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

11 to 17 October 2026
4 October to 10 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन