झारखंड:आधी रात घर में घुसना और महिला के कपड़े उठाना ‘रेप की कोशिश’ नहीं है। 27 साल पुराने ‘अटेम्पट टू रेप’ केस में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। इसी के साथ ही झारखंड हाईकोर्ट ने ‘अटेम्पट टू रेप’ केस में दोषी को राहत देते हुए चार साल की सश्रम कारावास की सजा को रद्द कर दिया। हालांकि अदालत ने मामले को महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से किए गए हमले यानी धारा 354 IPC के तहत माना है।
जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव ने सुनाया फैसला
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महिला के कपड़े उठाकर उसे पकड़ लेने से अपराध साबित नहीं होता। जब तक रेप करने की दिशा में कोई विशिष्ट और स्पष्ट प्रत्यक्ष कृत्य सामने न आएं, तब तक सबूत यह अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं कहा जाएगा।
चार साल की सश्रम कारावास की सजा को रद्द किया
जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने निचली अदालत के फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए आरोपी को IPC की धारा 376/511 के तहत मिली चार साल की सश्रम कारावास की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता की पूरी गवाही को देखने पर आरोपी की ओर से ऐसा कोई खास प्रत्यक्ष कृत्य सामने नहीं आता, जिसे रेप करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सके। हालांकि, आरोपी का आचरण अश्लील हमला था, जिससे महिला की लज्जा भंग होने की आशंका थी। इसी के साथ ही हाईकोर्ट ने ‘अटेम्पट टू रेप’ केस में दोषी को राहत देते हुए चार साल की सश्रम कारावास की सजा को रद्द कर दिया।

