पन्ना। जिस जंगल में बाघों की दहाड़ सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है, वहीं अगर कुल्हाड़ियों की खनक सुनाई देने लगे, तो यह सिर्फ एक वारदात नहीं बल्कि सिस्टम पर सीधा सवाल होता है। पन्ना टाइगर रिजर्व से आई यह खबर वन सुरक्षा की हकीकत और तस्करों के बढ़ते हौसले उजागर करती है।
पन्ना टाइगर रिजर्व, जिसे देश के सबसे सुरक्षित वन क्षेत्रों में गिना जाता है, बीती रात खौफ और खून से सना नजर आया। अवैध सागौन कटाई रोकने गए वनकर्मियों पर तस्करों ने जिस बेरहमी से हमला किया, उसने वन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
घटना गुमानगंज बीट की है, जहां बीट गार्ड दिनेश चक्रवर्ती और सुरक्षा श्रमिक चेला यादव आधी रात गश्त पर निकले थे। जंगल में हलचल देख जब उन्होंने अवैध कटाई रोकने की कोशिश की, तभी पहले से घात लगाए तस्करों ने चारों तरफ से घेर लिया। लाठी-डंडों और कुल्हाड़ियों से ताबड़तोड़ हमला किया गया। किसी का हाथ टूट गया, तो किसी की आंख के पास गहरे जख्म आए।
यह हमला सिर्फ दो वनकर्मियों पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर किया गया हमला माना जा रहा है। जिस टाइगर रिजर्व में आम आदमी का प्रवेश सख्त नियंत्रण में होता है, वहां आधा दर्जन हथियारबंद तस्करों का खुलेआम घूमना गंभीर चिंता का विषय है। घायल वनकर्मियों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। पुलिस ने चार नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जब जंगल के रखवाले ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वन्यजीवों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? लगातार बढ़ रही अवैध कटाई और तस्करी यह संकेत दे रही है कि तस्करों के हौसले बुलंद हैं और डर खत्म होता जा रहा है।
वन विभाग और प्रशासन के लिए यह सिर्फ कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी की भी परीक्षा है। अब देखना होगा कि क्या इस खूनी संघर्ष के बाद तस्करों पर वाकई नकेल कसी जाएगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
पन्ना टाइगर रिजर्व में तस्करों का वनकर्मियों पर प्राणघातक हमला


